Arvind Kejriwal’s Shift from Clean Politics Advocate to Corruption Accusations

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New Delhi : Arvind Kejriwal, once a prominent figure in the Anna Hazare-led anti-corruption movement, has seen a significant transformation in his political stance. During the early 2010s, Kejriwal was a vocal advocate for clean politics, insisting that leaders accused of corruption should immediately resign from their positions. He even suggested that such individuals should face imprisonment, promoting this as a cornerstone of transparent governance.

However, Kejriwal’s actions as Delhi’s Chief Minister starkly contrasted with his earlier rhetoric. Arrested on corruption charges related to the alleged excise policy scam, he became the first CM to govern from jail without stepping down. This decision drew widespread criticism and highlighted a perceived hypocrisy, as noted by political opponents and commentators.

The irony of Kejriwal’s situation was further emphasized when Delhi’s electorate voted him out of office in the 2025 assembly elections, reflecting public disillusionment with his governance. His arrest in June 2024 and subsequent five-month jail term, detailed in a BBC report from September 13, 2024, marked a turbulent period in his career, with bail granted amidst ongoing legal battles.

Kejriwal’s shift from advocating clean politics to facing corruption allegations himself has become a focal point of political discourse, underscoring broader challenges of accountability and integrity within Indian politics. The Aam Aadmi Party (AAP) has yet to comment on the long-term implications of this shift for its future direction.

चोर अध्यक्ष का बिहार विकास मॉडल

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बिहार, वह धरती जहां गंगा की लहरें और नेताओं की चालें एक साथ लहराती हैं, आज एक नए युग की दहलीज पर खड़ा है। बिहार में एक राजनीतिक दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष, जिनकी चोरी को कोर्ट ने सजदा किया, बिहार के भाग्य विधाता नना चाहते हैं। पिछली बार दस साल से अधिक समय के लिए इन्हें बिहार की जनता ने प्रदेश सौंपा था तो इन्होंने पूरे बिहार को जंगल बना दिया था। फिर इनके राज को सुप्रीम कोर्ट ने ‘जंगलराज’ की संज्ञा दे दी।

एक बार फिर पूरी मुस्तैदी से पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनकर ये बिहार की कुर्सी को हथियाना चाह रहे हैं। कहते हैं, जब चोर ही नेता हो, तो विकास की परिभाषा भी बदल जाती है। अब चोरी को अपराध नहीं, कला मान लिया गया है, और हमारे चोर महाराज इस कला के पिकासो हैं।

सोचिए, एक चोर राष्ट्रीय अध्यक्ष के नेतृत्व में बिहार का क्या हाल होगा! जहां पहले लोग रात में ताले लगाते थे, वहां अब ताले खोलने की ट्रेनिंग स्कूलों में शुरू हो जाएगी। चोरी को विधानसभा में बहुमत से वैध करार दे दिया जाए, तो बिहार देश का पहला राज्य बन जाएगा जहां चोरों को सरकारी मान्यता मिलेगी। हर जिले में एक ‘चोर प्रशिक्षण केंद्र’ खुलेगा, जहां युवाओं को जेबकटी, सेंधमारी और डिजिटल चोरी की बारीकियां सिखाई जाएंगी। हमारे अध्यक्ष जी का विजन है—हर हाथ में हुनर, हर जेब में छुरा!

विकास का यह मॉडल अनोखा होगा। चोरी को वैध करने से बिहार की अर्थव्यवस्था उछाल मार लेगी। लूटपाट से जीडीपी बढ़ेगी, अपहरण से रोजगार सृजन होगा। थाने बंद होंगे, क्योंकि चोरी अब अपराध नहीं, बल्कि स्टेट क्राफ्ट होगा। हमारे चोर अध्यक्ष की सोच है कि अगर भ्रष्टाचार को रोका नहीं जा सकता, तो उसे संगठित कर दो! बिहार में हर गली-नुक्कड़ पर ‘चोरी लाइसेंस’ बांटे जाएंगे। लाइसेंसधारी चोर ही सरकारी टेंडर लेंगे, क्योंकि चोरी में पारदर्शिता तो बरतनी ही पड़ेगी।

लेकिन सावधान! बिहार की जनता को ऐसे नेताओं से सतर्क रहना होगा। अगर ये चोर गद्दी पर काबिज हो गए, तो बिहार का हर घर ‘चोरी संरक्षित क्षेत्र’ बन जाएगा। फिर न गंगा बचेगी, न गाय, न बजट। चोर अध्यक्ष का मंत्र है—‘सब कुछ बिकाऊ, बस मौका चाहिए!’

बिहार को चाहिए कि ऐसे नेताओं को गद्दी से दूर रखे, वरना चोरी को विधानसभा से मान्यता मिलते ही बिहार ‘चोर प्रदेश’ का तमगा पा लेगा। फिर न विकास होगा, न विश्वास बचेगा—बस चोरों का राज होगा, और बिहार की जनता ताली बजाएगी।

Nearly 100 film works submitted for CNFF-25

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Nava Thakuria

Guwahati: As the 9th Chalachitram National Film Festival 2025 (CNFF-25) sets for 25 & 26 October next at Jyoti Chitraban film studio premises in Kahilipara, nearly 100 film works have reached the organizing committee till 15 August from various parts of northeast Bharat and also outside the region. The two-day annual festival, initiated for fostering nationalism through cinemas and paying homage to the country’s thousands of years old civilization, culture and heritage, is made open for short features and documentaries (produced between 1 November 2024 and 15 September 2025) with a time frame of maximum 25 minutes.

Organised by Chalachitram (www.chalachitram.in), a subsidiary of Vishwa Samvad Kendra Assam, CNFF-25 with the central theme ‘Our Heritage, Our Pride’, is dedicated for providing a dignified space for the serious film-makers, cine workers, appreciators and general audience. The entries for both the competition (confined to northeastern film makers) and only screening categories (from the rest of India) have been received through FilmFreeway and other digital & non-digital communication facilities, where a few more entries are expected by 20 September next.

The awards include Best Short Feature, Best Documentary, Best Director, Best Screenplay, Best Cinematography and Best Editing under Northeast category and Best Short Feature & Best Documentary in the national category. The winners will be honoured with trophies, certificates, and cash prizes, informed CNFF-25 secretary Bhagwat Pritam Dutta, adding that a high power review committee and a jury board have already formed.

The entries with various sub-themes like Indian heritage, indigenous society, heroes of the freedom movement, epics & mythology, national integration & solidarity, arts & artisans, manuscripts & paintings, museums, wood carving, indigenous festivals, ethnic groups, monuments & heritage sites, traditional sports, women empowerment, tradition & family values, yoga & Ayurveda, cultural nationalism, human rights, tourism potential, etc have been acknowledged, said VSK Assam secretary Kishor Shivam.

म्यूचुअल फंड्स में निवेश – सही विकल्प कैसे चुनें?

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मुंबई : म्यूचुअल फंड्स में निवेश शेयर बाजार में धन सृजन का एक लोकप्रिय तरीका है, लेकिन विभिन्न प्रकार के फंड्स के बीच अंतर को समझना निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण है। स्मॉल कैप, मिड कैप, लार्ज कैप, मल्टी कैप और फ्लेक्सी कैप फंड्स बाजार पूंजीकरण (मार्केट कैपिटलाइजेशन) के आधार पर कंपनियों में निवेश करते हैं, और प्रत्येक की जोखिम-रिटर्न प्रोफाइल अलग होती है। आइए इनके बीच अंतर और निवेशकों के लिए उनकी उपयुक्तता को समझें, साथ ही एक न्यूज रिपोर्ट के माध्यम से इसे विस्तार से देखें।स्मॉल कैप, मिड कैप, लार्ज कैप, मल्टी कैप और फ्लेक्सी कैप फंड्स में अंतर

लार्ज कैप फंड्स: ये फंड्स मुख्य रूप से उन कंपनियों में निवेश करते हैं, जिनका मार्केट कैपिटलाइजेशन 20,000 करोड़ रुपये से अधिक होता है, जैसे रिलायंस, टीसीएस, और एचडीएफसी बैंक। ये कंपनियां स्थिर, अच्छी तरह स्थापित, और कम अस्थिर होती हैं। लार्ज कैप फंड्स कम जोखिम और स्थिर रिटर्न प्रदान करते हैं, लेकिन विकास की संभावना सीमित हो सकती है।

मिड कैप फंड्स: मिड कैप फंड्स 5,000 करोड़ से 20,000 करोड़ रुपये के मार्केट कैप वाली कंपनियों (रैंक 101-250) में निवेश करते हैं। ये कंपनियां स्थिरता और विकास के बीच संतुलन प्रदान करती हैं, जो लार्ज कैप से अधिक रिटर्न लेकिन स्मॉल कैप से कम जोखिम देती हैं।
स्मॉल कैप फंड्स: ये फंड्स 5,000 करोड़ रुपये से कम मार्केट कैप वाली कंपनियों (रैंक 251 और उससे अधिक) में निवेश करते हैं। इनमें उच्च विकास की संभावना होती है, लेकिन ये अत्यधिक अस्थिर और जोखिम भरे होते हैं।

मल्टी कैप फंड्स: मल्टी कैप फंड्स लार्ज, मिड और स्मॉल कैप कंपनियों में निवेश करते हैं, जिसमें SEBI के दिशानिर्देशों के अनुसार कम से कम 25% निवेश प्रत्येक श्रेणी में होना चाहिए। ये फंड्स विविधीकरण और जोखिम-रिटर्न संतुलन प्रदान करते हैं।
फ्लेक्सी कैप फंड्स: फ्लेक्सी कैप फंड्स में फंड मैनेजर को किसी भी मार्केट कैप में निवेश की स्वतंत्रता होती है, बिना किसी न्यूनतम आवंटन की बाध्यता। यह लचीलापन बाजार की स्थितियों के आधार पर रणनीति बदलने की अनुमति देता है।

निवेशकों के लिए उपयुक्तता

लार्ज कैप फंड्स: कम जोखिम लेने वाले निवेशकों, विशेष रूप से नौसिखियों या रिटायरमेंट के करीब के निवेशकों के लिए उपयुक्त। ये स्थिर रिटर्न और पूंजी संरक्षण चाहने वालों के लिए आदर्श हैं।

मिड कैप फंड्स: मध्यम जोखिम सहनशीलता वाले निवेशकों के लिए, जो स्थिरता और विकास दोनों चाहते हैं। ये 5-7 साल के निवेश क्षितिज वाले निवेशकों के लिए अच्छे हैं।

स्मॉल कैप फंड्स: उच्च जोखिम सहन करने वाले युवा निवेशकों के लिए, जो 7-10 साल के लिए निवेश कर सकते हैं और उच्च रिटर्न की उम्मीद करते हैं।

मल्टी कैप फंड्स: जो निवेशक विविधीकरण चाहते हैं और सभी मार्केट कैप में संतुलित निवेश की तलाश में हैं, उनके लिए उपयुक्त। ये मध्यम से उच्च जोखिम सहनशीलता वाले निवेशकों के लिए अच्छे हैं।

फ्लेक्सी कैप फंड्स: लचीले निवेश की चाह रखने वाले और फंड मैनेजर की विशेषज्ञता पर भरोसा करने वाले निवेशकों के लिए। ये मध्यम जोखिम और लंबी अवधि के रिटर्न के लिए उपयुक्त हैं।

शेयर बाजार में म्यूचुअल फंड्स निवेशकों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं, लेकिन स्मॉल कैप, मिड कैप, लार्ज कैप, मल्टी कैप और फ्लेक्सी कैप फंड्स के बीच सही विकल्प चुनना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। प्रत्येक फंड की अपनी विशेषताएं, जोखिम और रिटर्न प्रोफाइल हैं, जो निवेशकों की वित्तीय जरूरतों और जोखिम सहनशीलता पर निर्भर करते हैं।

लार्ज कैप फंड्स, जैसे निप्पॉन इंडिया लार्ज कैप फंड, उन निवेशकों के लिए आदर्श हैं जो स्थिरता और कम जोखिम चाहते हैं। ये फंड्स देश की शीर्ष 100 कंपनियों, जैसे रिलायंस और इन्फोसिस, में निवेश करते हैं, जो बाजार के उतार-चढ़ाव से कम प्रभावित होती हैं। पिछले पांच वर्षों में इस फंड ने 18-20% का औसत रिटर्न दिया है, जो इसे रूढ़िगत निवेशकों के लिए उपयुक्त बनाता है।

मिड कैप फंड्स, जैसे मोतीलाल ओसवाल मिडकैप फंड, मध्यम जोखिम और उच्च रिटर्न का संतुलन प्रदान करते हैं। ये फंड्स 101-250 रैंक वाली कंपनियों में निवेश करते हैं, जो स्थिरता के साथ विकास की संभावना रखती हैं। इस फंड ने पिछले पांच वर्षों में 25-30% का रिटर्न दिया है, जो मध्यम अवधि के निवेशकों के लिए आकर्षक है।

स्मॉल कैप फंड्स, जैसे क्वांट स्मॉल कैप फंड, उच्च जोखिम सहन करने वाले निवेशकों के लिए हैं। ये फंड्स छोटी कंपनियों में निवेश करते हैं, जिनमें विकास की संभावना अधिक होती है, लेकिन अस्थिरता भी ज्यादा होती है। क्वांट स्मॉल कैप ने पिछले पांच वर्षों में 32% से अधिक रिटर्न दिया है, जो इसे दीर्घकालिक निवेशकों के लिए आकर्षक बनाता है।
मल्टी कैप फंड्स, जैसे एचडीएफसी मल्टी कैप फंड, सभी मार्केट कैप में विविधीकरण प्रदान करते हैं। SEBI के दिशानिर्देशों के अनुसार, ये फंड्स लार्ज, मिड और स्मॉल कैप में न्यूनतम 25% निवेश करते हैं, जो जोखिम और रिटर्न का संतुलन बनाए रखते हैं। यह फंड मध्यम जोखिम लेने वाले निवेशकों के लिए उपयुक्त है, जो विविध पोर्टफोलियो चाहते हैं।
फ्लेक्सी कैप फंड्स, जैसे पैराग पारिख फ्लेक्सी कैप फंड, फंड मैनेजर को बाजार की स्थितियों के आधार पर किसी भी मार्केट कैप में निवेश की स्वतंत्रता देते हैं। पिछले एक वर्ष में इस फंड ने 43% तक रिटर्न दिया है, जो इसे लचीले और दीर्घकालिक निवेशकों के लिए आकर्षक बनाता है।
निवेश विशेषज्ञों का कहना है कि निवेशकों को अपने वित्तीय लक्ष्यों, जोखिम सहनशीलता और निवेश अवधि के आधार पर फंड चुनना चाहिए। उदाहरण के लिए, 7-10 साल की अवधि के लिए स्मॉल कैप फंड्स उपयुक्त हो सकते हैं, जबकि रिटायरमेंट के करीब के निवेशकों को लार्ज कैप फंड्स चुनना चाहिए। मल्टी कैप और फ्लेक्सी कैप फंड्स उन लोगों के लिए बेहतर हैं जो विविधीकरण और लचीलापन चाहते हैं।
(म्यूचुअल फंड्स में निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श करें और बाजार जोखिमों को समझें। सही फंड का चयन आपकी वित्तीय यात्रा को सफल बना सकता है।)

(Disclaimer: This story is for educational purposes only. The views and recommendations made above are those of individual analysts or broking companies, and not of Media Scan. We advise investors to check with certified experts before making any investment decisions.)
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