Rajasthan Govt to Set Up Language Labs for Students to Learn Foreign Languages: CM Sharma

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Jaipur: The Rajasthan government, in collaboration with the English and Foreign Language University (EFLU) and the Union Ministry of Human Resource Development, has unveiled plans to establish state-of-the-art language laboratories across the state. These facilities are poised to provide specialised training in key international languages, including English, French, Spanish and Japanese.

Chief Minister Bhajan Lal Sharma, in a post on X, described the initiative as a pivotal step toward equipping Rajasthan’s youth for success in an increasingly interconnected world.

He underscored that mastering global languages would empower young people—students, aspirants and professionals alike—to pursue overseas employment and higher education, while boosting their communication skills and employability in sectors such as tourism, business, IT, education and services.

The CM reaffirmed his vision of a “Developed Rajasthan”, asserting that it can only be realised by unlocking and nurturing the potential of the state’s younger generation through targeted skill development and international exposure.

The announcement follows a robust performance at last year’s Rising Rajasthan Global Investment Summit, where MoUs worth nearly Rs 35 lakh crore were signed, and multinational companies expressed strong interest in recruiting skilled Rajasthani youth.

बिहार ब्यूटी एक्सपो 2025: सौंदर्य और नवाचार का शानदार मंच

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पटना: बिहार की राजधानी पटना में आयोजित बिहार ब्यूटी एक्सपो 2025 ने सौंदर्य उद्योग के उत्साह को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। यह तीन दिवसीय मेगा इवेंट, जो 20 अगस्त को गांधी मैदान के पास एक भव्य प्रदर्शनी हॉल में शुरू हुआ, सौंदर्य, फैशन और वेलनेस के क्षेत्र में नवीनतम रुझानों को प्रदर्शित करने का एक शानदार मंच साबित हुआ। इस आयोजन ने स्थानीय और राष्ट्रीय स्तर के सौंदर्य पेशेवरों, ब्रांड्स और उत्साही लोगों को एक छत के नीचे लाकर बिहार के सौंदर्य उद्योग को नई दिशा दी।

एक्सपो में 100 से अधिक स्टॉल्स लगाए गए, जहां कॉस्मेटिक्स, स्किनकेयर, हेयरकेयर, और वेलनेस प्रोडक्ट्स की विस्तृत रेंज प्रदर्शित की गई। प्रमुख ब्रांड्स जैसे लक्मे, मेबेलिन, और हिमालया ने अपने नवीनतम उत्पादों का प्रदर्शन किया, जबकि स्थानीय स्टार्टअप्स ने देसी और जैविक सौंदर्य उत्पादों को पेश कर दर्शकों का ध्यान खींचा। आयोजन में मेकअप आर्टिस्ट्स, हेयर स्टाइलिस्ट्स, और वेलनेस कोच द्वारा लाइव डेमो सेशन भी आयोजित किए गए, जिन्होंने नवीनतम तकनीकों और ट्रेंड्स को साझा किया।

एक्सपो का मुख्य आकर्षण रहा ब्यूटी पेजेंट 2025, जिसमें बिहार के विभिन्न जिलों से आए प्रतिभागियों ने अपनी प्रतिभा और आत्मविश्वास का प्रदर्शन किया। विजेताओं को नकद पुरस्कार और ब्रांड एंडोर्समेंट के अवसर प्रदान किए गए। इसके अलावा, विशेषज्ञों द्वारा आयोजित सेमिनार में स्किनकेयर रूटीन, सस्टेनेबल ब्यूटी, और डिजिटल मार्केटिंग जैसे विषयों पर चर्चा हुई।

आयोजकों के अनुसार, इस एक्सपो ने न केवल सौंदर्य उद्योग को बढ़ावा दिया, बल्कि बिहार में रोजगार और उद्यमिता के अवसरों को भी प्रोत्साहित किया। हजारों आगंतुकों ने इस आयोजन में हिस्सा लिया, जिससे बिहार में सौंदर्य और फैशन के क्षेत्र में बढ़ती रुचि का पता चलता है। यह आयोजन 22 अगस्त को समाप्त होगा, और इसके अगले संस्करण की प्रतीक्षा पहले से ही शुरू हो चुकी है।

Source: https://beautyexpo.in/

सीएसडीएस ने हिन्दू समाज को बांटा और मुस्लिम-ईसाई एकता को बढ़ावा दिया: एक विश्लेषण

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दिल्ली। भारतीय राजनीति और समाज पर गहरे प्रभाव डालने वाली संस्था सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ डेवलपिंग सोसाइटीज (सीएसडीएस) पर इन दिनों सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि इस सर्वे एजेंसी ने अपनी जाति-आधारित चुनाव विश्लेषण रिपोर्ट्स के जरिए हिन्दू समाज को तोड़ने का काम किया, जबकि मुस्लिम और ईसाई समुदायों को एकजुट रखने में अपनी भूमिका निभाई। वरिष्ठ पत्रकार और सामाजिक विश्लेषक दिलीप मंडल ने सीएसडीएस को ‘भारतीय समाज के लिए खतरा’ करार देते हुए इसके आंकड़ों पर सवाल उठाए हैं, जिसने देश की सामाजिक संरचना को प्रभावित किया है।

हिन्दू समाज में जातीय दरार
सीएसडीएस की शुरुआत से ही जाति-आधारित वोटिंग पैटर्न पर फोकस रहा है, जो मुख्य रूप से हिन्दू समुदाय तक सीमित रहा। 2009 के उत्तर प्रदेश लोकसभा चुनावों के आंकड़ों में सीएसडीएस ने जाटव और गैर-जाटव समुदायों के वोटिंग व्यवहार को अलग-अलग दर्शाया। इन आंकड़ों के अनुसार, जाटवों ने बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) का समर्थन किया, जबकि गैर-जाटव वोट अन्य दलों में बंट गए। यह विश्लेषण 2007 में मायावती की सरकार बनने के बाद शुरू हुआ, जब कांग्रेस ने यूपी में अपनी सियासी जमीन मजबूत करने के लिए सक्रियता दिखाई। राहुल गांधी के नेतृत्व में बीएसपी के खिलाफ आंदोलन और फायरिंग की घटनाओं ने इस विभाजन को और गहरा किया।

सीएसडीएस के आंकड़ों ने मीडिया और टीवी डिबेट्स में हलचल मचा दी। हजारों लेख और सैकड़ों शो में इन आंकड़ों का हवाला दिया गया, जिससे हिन्दू समाज में जातीय संदेह और टकराव बढ़ा। इन आंकड़ों ने नेताओं की सोच को भी प्रभावित किया, जहां वे वोटरों को नहीं, बल्कि जातियों के रूप में देखने लगे। हालांकि, यह भी सच है कि वोटिंग में जाति एक कारक हो सकती है, लेकिन यह एकमात्र निर्धारक नहीं है। फिर भी, सीएसडीएस के विश्लेषण ने इस धारणा को मजबूत किया कि हिन्दू वोटर अपनी जाति के आधार पर ही फैसला लेते हैं, जो सामाजिक एकता को नुकसान पहुंचाने वाला साबित हुआ।

मुस्लिम और ईसाई समुदाय: एकजुटता का दावा

सीएसडीएस के आलोचकों का कहना है कि इस संस्था ने मुस्लिम और ईसाई समुदायों के वोटिंग पैटर्न को धार्मिक पहचान के तहत एकजुट दर्शाया, न कि जाति के आधार पर। सीएसडीएस मुसलमानों से जाति-आधारित सवाल नहीं पूछता, जिससे इन समुदायों की आंतरिक विविधता को नजरअंदाज किया जाता है। इससे मुस्लिम और ईसाई वोटरों को एकजुट धार्मिक ब्लॉक के रूप में पेश किया गया, जो राजनीतिक दलों के लिए रणनीति बनाने में सहायक रहा। यह दृष्टिकोण हिन्दू समाज में जातीय विभाजन को बढ़ाने के साथ-साथ अल्पसंख्यक समुदायों में एकता का भ्रम पैदा करता है।

राजनीतिक एजेंडा और विदेशी फंडिंग
सीएसडीएस पर राजनीतिक एजेंडा चलाने का भी आरोप है। 2007-09 के दौरान कांग्रेस की यूपी में वापसी और बीएसपी-एसपी की कमजोरी को सीधे तौर पर सीएसडीएस के आंकड़ों से जोड़ा जाता है। यह संस्था विदेशी वित्त पोषण से संचालित है और बेलगाम होकर भारतीय राजनीति को प्रभावित कर रही है।
एससी लिस्ट में मुस्लिमों को शामिल करने की साजिश?

नया विवाद सीएसडीएस के उस सर्वे को लेकर है, जिसमें दावा किया गया कि 59% लोग मुसलमानों को अनुसूचित जाति (एससी) सूची में शामिल करना चाहते हैं। यह बाबा साहब भीमराव आंबेडकर के संविधान आदेश, 1950 के खिलाफ है। यह कदम देश में और सामाजिक तनाव पैदा करेगा, जो फंडिंग एजेंसियों के हित में हो सकता है। चूंकि सीएसडीएस अपना रॉ डाटा सार्वजनिक नहीं करता, इन दावों की स्वतंत्र जांच संभव नहीं है, जो आलोचकों के लिए चिंता का विषय है।

सामाजिक सौहार्द पर असर
सीएसडीएस के आंकड़ों ने भारतीय समाज पर गहरा असर डाला है। हिन्दू समाज में जातीय विभाजन को बढ़ावा देने और मुस्लिम-ईसाई समुदायों को एकजुट धार्मिक पहचान के रूप में पेश करने से राजनीतिक ध्रुवीकरण तेज हुआ है। यह संस्था जानबूझकर सामाजिक सौहार्द को नुकसान पहुंचा रही है। दूसरी ओर, सीएसडीएस के समर्थक इसे वैज्ञानिक विश्लेषण का हिस्सा मानते हैं, जो लोकतंत्र को समझने में मददगार है। फिर भी, इसके तरीकों और निष्पक्षता पर सवाल बने रहेंगे, जब तक कि यह अपने डाटा को पारदर्शी न करे।

असम में पत्रकार अभिसार शर्मा के खिलाफ एफआईआर दर्ज, आर्थिक अनियमितता के पुराने आरोप भी चर्चा में

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गुवाहाटी: वरिष्ठ पत्रकार और यूट्यूबर अभिसार शर्मा के खिलाफ असम की गुवाहाटी क्राइम ब्रांच ने एफआईआर दर्ज की है। यह कार्रवाई अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के सदस्य आलोक बरूआ की शिकायत पर हुई, जिसमें शर्मा पर असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा पर सांप्रदायिक राजनीति का आरोप लगाने का दावा किया गया है। शर्मा ने अपने यूट्यूब चैनल पर असम सरकार की नीतियों, विशेषकर महाबल सीमेंट को 3000 बीघा जमीन आवंटन और मुसलमानों व मदरसों के खिलाफ कथित प्रचार की आलोचना की थी। शर्मा ने एक्स पर कहा, “यह एफआईआर बेमानी है, इसका जवाब वैधानिक रूप से दिया जाएगा।”

अभिसार शर्मा पहले भी विवादों में रहे हैं। 2023 में दिल्ली पुलिस ने न्यूजक्लिक मामले में उनसे पूछताछ की थी, जिसमें उन पर और न्यूजक्लिक पर चीन से अवैध फंडिंग के आरोप लगे थे। यूएपीए और आईपीसी की धाराओं के तहत जांच के दौरान उनके घर पर छापेमारी हुई, जिसमें लैपटॉप और मोबाइल जब्त किए गए। इसके अलावा, 2018 में उन पर और उनकी पत्नी सुमना सेन पर एनडीटीवी से जुड़े वित्तीय अनियमितता के आरोप लगे, जिन्हें बाद में सीबीआई जांच में खारिज कर दिया गया।

शर्मा, जो अपनी कांग्रेस समर्थक छवि के लिए जाने जाते हैं, ने इन आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताया है। मामले की आगे की जांच जारी है।

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