देश के गृह मंत्री अमित शाह की सदन में की गई टिप्पणियों पर प्रकाश

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नई दिल्ली:आज संसद में एक तीखी राजनीतिक बहस के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस पार्टी पर निशाना साधते हुए दो प्रमुख घटनाओं का जिक्र किया, जिन्हें उन्होंने अपनी राजनीतिक यात्रा और विपक्ष के दोहरे चरित्र से जोड़ा। इन घटनाओं में उनकी अपनी गिरफ्तारी और लालू प्रसाद यादव के लिए लाए गए अध्यादेश का मुद्दा शामिल है। आइए इन घटनाओं को विस्तार से समझते हैं और शाह की टिप्पणियों को उनके संदर्भ में देखते हैं।

घटना 1: अमित शाह की गिरफ्तारी और राजनीतिक बदले की कार्रवाई
आज सदन में कांग्रेस के एक नेता ने अमित शाह पर निजी टिप्पणी की, जिसमें दावा किया गया कि जब कांग्रेस ने उन्हें फर्जी मामले में फंसाकर गिरफ्तार कराया, तब उन्होंने इस्तीफा नहीं दिया। इस पर गृह मंत्री ने पलटवार करते हुए कहा, “मैं कांग्रेस को याद दिलाना चाहता हूँ कि मैंने अरेस्ट होने से पहले ही इस्तीफा दे दिया था और बेल पर बाहर आने के बाद भी, जब तक मैं अदालत से पूरी तरह निर्दोष साबित नहीं हुआ, तब तक मैंने कोई संवैधानिक पद नहीं लिया था। मेरे ऊपर लगाए गए फर्जी केस को अदालत ने यह कहते हुए खारिज किया कि केस राजनीतिक बदले (political vendetta) से प्रेरित था।”

यह घटना 2010 की है, जब अमित शाह, जो उस समय गुजरात के राज्य गृह मंत्री थे, को सीबीआई ने सोहराबुद्दीन शेख फर्जी मुठभेड़ मामले में जुलाई 2010 में गिरफ्तार किया था। कांग्रेस पर आरोप लगाया गया कि यह कार्रवाई राजनीतिक द्वेष के तहत की गई थी। शाह ने गिरफ्तारी से पहले अपने पद से इस्तीफा दे दिया था और 2014 तक किसी संवैधानिक पद पर नहीं लौटे। दिसंबर 2014 में मुंबई की एक विशेष सीबीआई अदालत ने उन्हें बरी कर दिया, जिसमें अदालत ने पाया कि उनके खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं था और मामला राजनीतिक रूप से प्रेरित था। शाह ने आज इस घटना को याद करते हुए कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और एनडीए हमेशा नैतिक मूल्यों के पक्षधर रहे हैं, और लाल कृष्ण आडवाणी जैसे नेताओं ने भी आरोप लगते ही इस्तीफा दे दिया था, जबकि कांग्रेस ने श्रीमती इंदिरा गांधी के समय से शुरू हुई अनैतिक परंपराओं को आगे बढ़ाया है।

घटना 2: लालू प्रसाद यादव के लिए अध्यादेश और कांग्रेस का दोहरा चरित्र
शाह ने अपनी दूसरी टिप्पणी में कांग्रेस पर लालू प्रसाद यादव को बचाने के लिए अध्यादेश लाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “जिस श्री लालू प्रसाद यादव जी को बचाने के लिए कांग्रेस पार्टी अध्यादेश लाई थी, जिसका श्री राहुल गांधी ने विरोध किया था, आज वही राहुल गांधी पटना के गांधी मैदान में लालू जी को गले लगा रहे हैं। विपक्ष का यह दोहरा चरित्र जनता भली-भांति समझ चुकी है।”

यह घटना 2013 की है, जब लालू प्रसाद यादव, जो उस समय बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के नेता थे, को चारा घोटाले में दोषी पाया गया था। उन्हें ₹37 करोड़ के घोटाले में पांच साल की सजा सुनाई गई थी, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने दोषी सांसदों और विधायकों को अयोग्य ठहराने का फैसला दिया था। कांग्रेस नेतृत्व वाली यूपीए सरकार ने इस फैसले को पलटने के लिए एक अध्यादेश लाने का प्रयास किया, ताकि यादव जैसे दोषी नेताओं को बचाया जा सके। हालांकि, राहुल गांधी ने इस अध्यादेश का सार्वजनिक रूप से विरोध किया था, जिसके बाद इसे वापस ले लिया गया था। लेकिन हाल ही में, जनवरी 2025 में, राहुल गांधी ने पटना में लालू प्रसाद यादव से मुलाकात की और उन्हें गले लगाया, जिसे शाह ने विपक्ष के दोहरे चरित्र का प्रमाण बताया। इस मुलाकात के दौरान गांधी ने यादव के घर पर गायों और बकरियों के साथ समय बिताया और मंदिर में प्रार्थना की, जो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी।

शाह का समग्र बयान और विपक्ष पर हमला

शाह ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि आज संसद में पेश किए गए एक बिल पर चर्चा के लिए इसे संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के सामने रखा जाना था, लेकिन कांग्रेस के नेतृत्व में पूरा इंडी गठबंधन भ्रष्टाचारियों को बचाने के लिए “शर्म और हया” छोड़कर इसका भद्दे तरीके से विरोध कर रहा है। उन्होंने दावा किया कि आज विपक्ष जनता के सामने पूरी तरह से उजागर हो गया है।
अमित शाह की आज की टिप्पणियां न केवल उनकी व्यक्तिगत राजनीतिक यात्रा को रेखांकित करती हैं, बल्कि कांग्रेस और विपक्ष पर गंभीर आरोप भी लगाती हैं। उनकी गिरफ्तारी और लालू प्रसाद यादव के लिए अध्यादेश जैसे मुद्दों को उठाकर उन्होंने नैतिकता और राजनीतिक जवाबदेही का मुद्दा केंद्र में लाने की कोशिश की है। दूसरी ओर, विपक्षी दलों ने शाह के बयानों को खारिज करते हुए उनके अतीत के आरोपों को फिर से उठाया है, जिससे राजनीतिक तनाव और बढ़ गया है। यह बहस आने वाले दिनों में संसद और जनता के बीच चर्चा का केंद्र बिंदु बनी रहेगी।
(स्रोत: अमित शाह का ट्वीट, https://x.com/AmitShah/status/1958141355735007577,)

संजय कुमार के झूठ ने कांग्रेस अभियान को दिया समर्थन, विवाद गहराया

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नई दिल्ली : सीएसडीएस (सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ डेवलपिंग सोसाइटीज) के निदेशक संजय कुमार ने अपने एक झूठे दावे से कांग्रेस के बिहार यात्रा अभियान को समर्थन देकर विवाद को नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया है। 17 अगस्त को राहुल गांधी ने बिहार की यात्रा शुरू की, जिसके साथ ही सोशल मीडिया पर #वोट_चोरी और #राहुल_गांधी_का_पर्दाफाश जैसे हैशटैग ट्रेंड करने लगे। कांग्रेस ने अपने अभियान में विचारक योगेंद्र यादव (@_YogendraYadav) को भी टैग किया। उसी दिन संजय कुमार ने एक पोस्ट में महाराष्ट्र चुनावों के डेटा का गलत विश्लेषण पेश किया, जिसे बाद में उन्होंने झूठ माना और माफी मांगी।

संजय ने दावा किया था कि कुछ निर्वाचन क्षेत्रों में मतदाताओं की संख्या में भारी कमी आई, जो कांग्रेस के “वोट चोरी” के आरोपों को बल देता था। हालांकि, बाद में उन्होंने स्वीकार किया कि उनकी टीम ने 2024 के लोकसभा और विधानसभा डेटा में त्रुटि की, जिसके कारण गलत नतीजे निकले। इस गलती के बाद उन्होंने पोस्ट हटा ली और माफी जारी की। फिर भी, इस झूठ ने कांग्रेस के नैरेटिव को शुरूआती बढ़ावा दिया, जिससे चुनाव आयोग (ईसीआई) और भाजपा ने कड़ी प्रतिक्रिया दी।

भाजपा नेता अमित मालवीय ने इसे कांग्रेस की “झूठी कहानी” करार दिया, जबकि आईसीएसएसआर ने सीएसडीएस को नोटिस जारी कर डेटा हेरफेर की जांच शुरू की। कांग्रेस इसे विपक्ष की रणनीति बता रही है, लेकिन संजय के झूठ स्वीकारने से उनकी और सीएसडीएस की विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे हैं। यह घटना चुनावी प्रक्रिया पर भरोसे को चुनौती दे रही है।

सुनिता विलियम्स का चौंकाने वाला खुलासा

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अनिल डागा

दिल्ली। अंतरिक्ष यात्री सुनिता विलियम्स का नौ महीने अंतरिक्ष में बिताने के बाद पत्रकारों से दिया गया बयान अब पूरे विश्व में चर्चा का विषय बना हुआ है।

उन्होंने कहा—”मुझे ऐसा लगता है कि ईश्वर की इच्छा से मैं अंतरिक्ष में फँसी रही। जब मैं अंतरिक्ष में 20 दिन की हुई, तो मुझे ऐसा लगा जैसे मैं मृत्यु का सामना कर रही हूँ। जब मैंने सोचा कि अब भोजन और पानी की कमी के बीच मैं कैसे जीवित रहूँगी, तभी मुझे सनातन धर्म के चैत्र नवरात्रि के उपवास की याद आई। उस दिन से मैंने शाम को थोड़ा भोजन और पानी तथा सुबह थोड़ा पानी लेना शुरू किया। एक महीने बाद मैं स्वस्थ और प्रसन्न महसूस करने लगी। मुझे समझ आया कि मैं कुछ और समय तक टिक सकती हूँ।
“जब मैं मृत्यु की प्रतीक्षा कर रही थी, तो मैंने कंप्यूटर खोला और सोचा कि एक दिन बाइबिल पढ़ूँगी। पहले भी कई बार पढ़ चुकी थी, पर एक पन्ना पढ़ते ही ऊब गई। फिर मन हुआ कि रामायण और श्रीमद्भगवद्गीता दोबारा पढ़ूँ। (लगता है अब यह मुझे कोई शक्ति प्रदान कर रहा था।) मैंने (अंग्रेज़ी अनुवाद) डाउनलोड करके पढ़ना शुरू किया। 10-15 पन्ने पढ़ने के बाद मैं आश्चर्यचकित रह गई। उसमें गर्भ विज्ञान, समुद्र और आकाश का अद्भुत वर्णन था। मुझे लगा यह संसार को बताना चाहिए।
“अंतरिक्ष से देखने पर सूर्य ऐसा लगता है मानो कीचड़ के तालाब में बैठा हो। कभी-कभी ऊपर से कुछ आवाज़ें सुनाई देती थीं, जैसे मंत्रोच्चारण हो रहा हो। मुझे लगा कि यह संस्कृत-हिंदी के मंत्र हैं। मेरे साथी बैरी विलमोर ने कहा कि यह सब इसलिए हो रहा है क्योंकि मैं प्रतिदिन रामायण और गीता पढ़ती हूँ। इसके बाद मैंने गहराई से रामायण और गीता पढ़ने का निश्चय किया। यह अद्भुत अनुभव था। मैंने तुरंत एलन मस्क को फोन कर यह बात बताई।

“अब आप चौंक जाएँगे। कुछ दिन तो ऐसे रहे जब हम बड़े-बड़े उल्कापिंडों को अपनी अंतरिक्ष स्टेशन की ओर आते देख डर गए। जब कोई उपाय नहीं था, तो हमने ईश्वर से प्रार्थना की और चमत्कारिक ढंग से कुछ छोटे-छोटे गोलाकार प्रकाशपुंज (जो तारे जैसे दिखते थे) नीचे उतरकर उन सबको नष्ट कर गए। हमें ऐसा लगा जैसे तारे ही उन्हें मार रहे हों। यह हमें बहुत अचंभित कर गया। नासा ने वादा किया है कि इस विषय पर और गहन शोध किया जाएगा।

“आठ महीने में मैंने संपूर्ण रामायण और श्रीमद्भगवद्गीता पढ़ ली। मेरे भीतर लौटने का आत्मविश्वास जग गया। मुझे लगा कि अब मैं पृथ्वी पर वापस आ सकती हूँ।

“अप्रैल माह में जब सूर्य अस्त हो रहा था, तब पृथ्वी के ऊपर से शेर जैसी आकृति दिखाई दी, जिसके साथ माता जी और त्रिशूल भी था। जैसे ही वह पृथ्वी के वातावरण में पहुँची, वह अदृश्य हो गई। मैं समझ नहीं पाई कि यह कहाँ से आई थी। मेरे साथी बैरी विलमोर और मैंने देखा कि यह किसी विशेष परत से आ रही थी। तब मैंने समझा कि आकाश की भी कई परतें हैं। हमने बहुत सोचा कि ये उड़ते हुए घोड़े क्यों नहीं दिखे। फिर मैंने न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट देखी, जिसमें हडसन नदी के ऊपर चाँद के दिखने और 2 मार्च से सनातनी उपवास शुरू होने की खबर थी। तभी से नंगल में इस घटना का अवलोकन हो रहा था। बाद में हमने समझा कि यह धरती पर व्रत खोलने का समय था। मुझे लगता है कि वे ईश्वर के आशीर्वाद लेकर आने वाले देवदूत थे।

“अब मुझे लगता है कि सनातन धर्म की श्रीमद्भगवद्गीता सत्य है। अब मेरा शोध वेदों के विज्ञान पर होगा-गर्भ विज्ञान, समुद्र और अंतरिक्ष विज्ञान पर। मैं खगोल विज्ञान की हर बात जानना चाहती हूँ। नासा में वेदों की अद्भुत शक्तियों पर शोध करने के लिए एक नया विभाग शुरू करने का प्रस्ताव भी दिया गया है।”

(यह आलेख श्री डागा के सोशल मीडिया पेज से साभार लिया गया है)

वाणी कपूर की फिल्म ‘अबीर गुलाल’ पर विवाद: सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग का सामना

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मुम्बई। बॉलीवुड अभिनेत्री वाणी कपूर की आगामी फिल्म ‘अबीर गुलाल’ को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। यह फिल्म, जिसमें उनके साथ पाकिस्तानी अभिनेता फवाद खान मुख्य भूमिका में हैं, 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद से चर्चा में है। इस हमले में 26 लोगों की जान गई थी, जिसके बाद भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ गया। फिल्म, जो एक रोमांटिक ड्रामा है और 9 मई को रिलीज होने वाली थी, को भारत में प्रतिबंधित कर दिया गया। वाणी कपूर ने हाल ही में हिंदुस्तान टाइम्स से बातचीत में इस विवाद पर अपनी चुप्पी तोड़ी। उन्होंने सोशल मीडिया पर मिल रही आलोचनाओं और ट्रोलिंग पर दुख जताया, पूछते हुए कि लोग व्यक्तिगत हमले क्यों करते हैं। वाणी ने कहा, “मैं आध्यात्मिक रूप से प्रेरित हूं और मुश्किल वक्त में खुद को संभालना जानती हूं। यह मेरे लिए सीखने का समय है।” उन्होंने यह भी बताया कि वह नकारात्मकता से ऊपर उठने की कोशिश करती हैं और अपने काम पर ध्यान देती हैं।


‘अबीर गुलाल’ को लेकर पहले भी विवाद हुआ था, जब महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना ने फवाद खान की कास्टिंग पर आपत्ति जताई थी। हमले के बाद फिल्म के गाने ‘खुदाया इश्क’ और ‘अंग्रेजी रंगरसिया’ यूट्यूब इंडिया से हटा दिए गए। वाणी ने अपने इंस्टाग्राम से फिल्म से संबंधित सभी पोस्ट हटा लीं, हालांकि टाइम्स नाउ के अनुसार, यह उनके द्वारा नहीं, बल्कि प्रोडक्शन टीम द्वारा किया गया। वाणी ने हाल ही में ‘रेड 2’ और ‘मंडाला मर्डर्स’ में अपनी सफलता के लिए प्रशंसा बटोरी, लेकिन ‘अबीर गुलाल’ के विवाद ने उनकी अन्य परियोजनाओं पर भी असर डाला। अब यह फिल्म 29 अगस्त को वैश्विक रिलीज के लिए तैयार है, लेकिन भारत में इसका प्रदर्शन नहीं होगा।

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