दिल्ली। सोशल मीडिया पर गुरुद्वारा बंगला साहिब से जुड़े एक वीडियो को जानबूझकर तोड़-मरोड़ कर प्रसारित किया जा रहा है। इसमें दावा किया गया कि पुलिसकर्मी जूते पहनकर गुरुद्वारे में घुस आए। वास्तविकता इससे बिल्कुल अलग है। वीडियो में दिख रहे पुलिसकर्मी उस सामान्य गलियारे/पास में चल रहे हैं, जिसका इस्तेमाल सभी श्रद्धालु गुरुद्वारे के अंदर प्रवेश से पहले जूते उतारने वाले स्थान तक पहुंचने के लिए करते हैं। यह प्रक्रिया हर आने वाले श्रद्धालु के लिए एक समान है।
सिख परंपरा में गुरुद्वारे के प्रति अत्यंत सम्मान और स्वच्छता का नियम स्पष्ट है। गुरु नानक देव जी की शिक्षाओं और गुरु ग्रंथ साहिब के प्रति आस्था के अनुसार, मुख्य परिसर, दरबार साहिब और पवित्र स्थल में प्रवेश से पूर्व जूते उतारना अनिवार्य माना जाता है। ऐतिहासिक रूप से भी गुरुद्वारों में बाहरी मार्ग, प्रांगण और जूते उतारने के निर्धारित स्थान तक चलना सामान्य रहा है। यह नियम किसी विशेष वर्ग या संस्था के लिए नहीं, बल्कि सभी आगंतुकों पर समान रूप से लागू होता है। वीडियो में दिख रही गतिविधि इसी स्थापित प्रथा के अनुरूप है।
इसके बावजूद वीडियो को इस तरह प्रसारित किया गया कि लग रहा हो कि पुलिस ने धार्मिक स्थल का अपमान किया। यह जानबूझकर की गई भ्रामक प्रस्तुति है, जिसका उद्देश्य दिल्ली पुलिस को बदनाम करना और एक सम्माननीय धार्मिक समुदाय की भावनाओं को आहत कर सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ना है। ऐसे झूठे प्रचार से न केवल कानून व्यवस्था पर सवाल उठते हैं, बल्कि सिक्ख परंपरा के वास्तविक स्वरूप को भी विकृत किया जाता है।
सत्य को तोड़-मरोड़कर सांप्रदायिक तनाव पैदा करने वाले प्रयासों का कड़ा विरोध जरूरी है। यह एक सामान्य दिन की वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर हो रहा है, जिसमे श्रद्धालु जूते चप्पल में दिखाई दे रहे हैं। इसी गलियारे का उपयोग दिल्ली पुलिस ने भी किया था।



