हिंदू जागरण का प्रखर स्वर विश्व हिन्दूपरिषद

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डॉ. परवेश चौधरी

 

दिल्ली । भगवान कृष्ण जन्माष्टमी वर्ष 1964 को देश और दुनिया में फैले हिंदू समाज को प्रखर स्वर देने हेतु विश्व हिंदू परिषद की स्थापना की गई। हम जानते ही हैं कि हिन्दू ही भारत की पहचान है। इसी हिंदू पहचान ने दुनिया में हमारे गौरव को बढ़ाया भारत में मुस्लिम शासन आने से पूर्व भारत का दुनिया के व्यापार में लगभग ३७ प्रतिशत की हिस्सेदारी थी।शिक्षा , तकनीक आदि में हम बहुत उन्नत थे। परंतु इसी भारत पर वर्षों तक प्रशासनिक अधीनता का कालखंड भी रहा। जिस कालखंड ने हम हिंदुओं के बीच ही कई भेदों को निर्मित कर दिया। इन्हींभेदों को आधार बनाकर हिन्दू समाज को छोटे-छोटे टुकड़ों में बांट दिया गया। हिंदू अपने स्वत्व को विस्मृत करने लगा लेकिन समय-समय तमाम महापुरुषों के आगमन में भारत को भारत के अपने स्व से भिन्न भी नहीं होने दिया।

आदि शंकराचार्य जी के द्वारा भारत के चार कोनों पर मठो की स्थापना वही हिंदू समाज के द्वारा देश भर में फैले शक्ति पीठों हमारे देवालयो एवं हमारी यात्राओं ने हमे आपस में जोड़े रखा। स्वतन्त्रता की लड़ाई में हिन्दू धर्म के मान बिंदुओं ने ही हमे अंग्रेजी शासन के विरुद्ध लड़ने की प्रेरणा दी तो वही इस्लामिक कालखंड में तमाम यातनाओं को सहते हुए भी हम अपने धर्म के साथ डट के खड़े रहे। भारत जब आजाद हुआ तो भारत के जनमानस ने इसे अपनी सामूहिक जीत माना हिंदुओं के साथ मुस्लिम समाज के लोग भी देश की आजादी के साथ कहदे थे। जिन्हें भारत छोड़ना था, वे छोड़कर चले गए, परंतु जो रहे, वे भारत को अपना मानकर रहे। परंतु उसी बीच पश्चिम के बौद्धिक जमात द्वारा कुछ शब्दों को भारत में प्रचारित किया गया जिसमे एक शब्द था सेक्युलरिज्म यानि की पंथनिरपेक्षता। पंथनिरपेक्षता तक तो ठीक था, लेकिन उससे आगे बढ़कर इसेइस देश में धर्मनिरपेक्षता के रूप में समझ लिया गया। जिसका परिणाम हुआ कि बहुसंख्यक हिंदू अपने ही देश में अपने ही धर्म हिंदू का प्रचार प्रसार नहीं कर सकता, नेता मंदिर जाने से भय करने लगता है।

 मुस्लिम हित चिंतक के रूप में सरकार दिखने लगती है, सरकार सेक्युलरिज्म के नाम पर हिन्दुओ के अधिकारो की उपेक्षा करने लगती है। इसीलिए तो राष्ट्रगौरव का प्रतीक सोमनाथ केवल हिंदुओं से जुड़ा हुआ देश के प्रधानमंत्री को दिखने लगता है। सरकार के द्वारा हिंदुओं की आस्था, गौमाता की बात करने वाले लोगों पर गोली चला दी जाती है। मुस्लिम वोट बैंक के चलते मुस्लिम समाज के कब्जों को वैध बनाने हेतु वक़्फ़ जैसा क़ानून बना दिया जाता है। जो मुस्लिम आबादी देश में करोड़ों की संख्या में है राजनीति, सरकार, शिक्षा, व्यापार सभी में उसकी अच्छी दखल है उसे अल्पसंख्यक का दर्जा मिल जाता है। ऐसे में हिंदुओं के मन में यह अवश्य आता है की यह सरकार मुस्लिम परस्त सरकार है। इन ही परिस्थितियों में विश्व हिंदू परिषद की स्थापना हुई। आज विश्व हिंदू परिषद ना की भारत में कार्य कर रही ही बल्कि कई दर्जन की संख्या में विदेशी भूमि पर भी परिषद की भारी पैठ है। परिषद ने अधीनता के खंड में उपजी जातिवादी बीमारी को सर्वप्रथम ठीक करने का अभियान लिया। वीएचपी ने कहा कि हिन्दव: सोदरा सर्वे, न हिन्दू पतितोंभवेत,मम दीक्षा हिन्दू रक्षा, मम मंत्र समानता इस एक उद्घोष ने समता और समरसता का अहम संदेश दिया। इस उद्घोष का पहला वाक्य कहता है, हम सबहिन्दू आपस में सहोदर है कोई यहा पतित नही,कोई निमन्न नही, कोई उच्च नहीहम सब एक पूर्वज की संतान है हम सब हिंदू है। वही दूसरा वाक्य कहता है कीहिन्दू समाज में कोई पतित कैसे हो सकता है जबकि हम सब तो एक ही है भारतकी पूरी चिंतन परम्परा ने इस बात को साबित किया है “सब हिंदू एक ही है” यहही तो समाजिक  समरसता का मूल मंत्र है।

अगले ही पंक्ति कहती है की हमनेसंकल्प  ही हिन्दू  समाज के संरक्षण का लिया है, वही अंतिम वाक्य है हमारा मंत्रएक ही है वो है समानता। इस प्रकार से भारत की हिन्दू  संस्कृति के गौरव केपुनर्जागरण के ध्येय को लिए परिषद के पथिक चल पड़े। बहुत कम ही लोग इसबात से अवगत होगे की परिषद के निर्माण की पृष्ठभूमि आख़िरकार क्या है, हमदेखे की भारत में इस्लामिक अक्रांता आए ईसाई शासक ब्रितानी आये। हज़ारोंवर्षों भारत में विदेशी अक्रांताओ के आने का इतिहास रहा है , वो मुट्ठी भर औरहम अधिक फिर भी चोर- लुटेरे बन आए मुस्लिम अक्रांता भी भारत के शासक बनबैठे इतना ही नही भारत में शासकों के ग़ुलामों ने भी शासन किया आप देखे कीहम तो ग़ुलामों के भी ग़ुलाम बने। भारत में इस्लाम का आतंक रहा उन्होंने भारतके ज़नमानस को ज़बरन मतांतरित किया , हमारे मंदिर तोड़े अपनी मस्जिदें बनाईखुद मुस्लिम से हिंदू बने वसीमरजा कहते है की दर्जन से ज़्यादा मन्दिरो को तोड़इस्लामिक अक्रांताओ ने मस्जिदें बनाई, सीताराम गोयल ने तो देश भर में हज़ारों मन्दिरो के तोड़ने का वर्णन किया है। इतना ही नहीं हंस बाकेर, ट्राविस एल स्मिथभी काशी के मंदिरों को तोड़ने और मस्जिद को लेकर लिखते हैं। मुस्लिम के बादभारत की सत्ता में अंग्रेज़ आए इन्होंने ने भी इस्लाम की भाँति  अपने धर्म के प्रचारको प्राथमिकता दी लेकिन इनका तरीक़ा मुस्लिम शासकों की भाँति तलवार केदम पर इस्लाम स्वीकार करवाना नही था। बल्कि पढ़े लिखे अंग्रेजो द्वारा “वाइटमेन बर्डन सिद्धांत”  के नाम पर हम गोरे लोगों का दायित्व है की इन जाहिलभारतीयों  को सभ्य बनाये। ब्रिटिश परिलियमेंट में बक़ायदा प्रस्ताव लाया गयाकी अंग्रेज़ी सत्ता की स्वीकारित हेतु हमें अपने ईसाई मत का प्रसार करना होगा।भारत में अंग्रेज़ी को भाषा के रूप में लागू किया गया तमाम हमारा साहित्यअंग्रेज़ी में रूपंतरित  किया गया अर्थ का अनर्थ किया गया। इस सब ने भारत केजन मानस में हीनता के भाव का संचार किया बस इसी से मुक्ति के अभियान कोचलाने का श्रेय किसी को जाता है तो वो है विश्व हिंदू परिषद।

भारत में अंग्रेजोके जाने के बाद भी ईसाई मिशनरियो द्वारा हमारे भोले-भले जनजातीय समाज, वंचित, ग़रीब एवं अनुसूचित जाति बन्धुओ को सेवा, विद्यालय एवं चिकित्सालयके नाम पर उनका ज़बरन मतांतरण किया ज़ाया जा रहा था। ऐसे ही कुछ घटनामध्यप्रदेश के वनवासी क्षेत्रों से मिली की ईसाई जनजातीय समाज को सेवाआदि के नाम पर उनको हिंदू से ईसाई बना रहे है। इसी मुद्दे ने विश्व हिन्दू परिषदके निर्माण में सहयोग किया अगर हिंदू समाज इसी तरह घटता रहेगा तो इससेभारत की अखंडता को भी ख़तरा होगा। वही हमें ये भी ज्ञात ही है की भारत केमंदिर- मठ ही थे।  जिन्होंने भारत को तब भी एक राष्ट्र भाव के साथ जोड़े रखाजब भारत पराधीन था। वी एच पी  ने जहा मतांतरण को लेकर देश भर में हिन्दू समाज के भीतर ज़नजागरण का कार्य प्रारम्भ किया वही इसी  समय “धर्मस्थानमुक्ति अभियान” का भी सूत्रपात हुआ। यह वही समय था जब एकात्मकता यज्ञयात्रा प्रारम्भ की गई  साथ ही गौरक्षा, छुआ-छुत, अशिक्षा, समाजिक असमानताआदि तमाम विषयों को जनमानस के बीच ले जाकर उन्हें इन सब से जोड़ा गया।कर्नाटक उडुपी प्रान्त के प्रथम हिन्दू सम्मेलन 13-14 दिसम्बर 1969 में संतो द्वाराकहा काया कि हिन्दूओ में अखण्ड एकात्मकता के भाव का जागरण होअस्पृश्यता समाप्त होनी चाहिए, इसी में संघ के द्वितीय सर संघचालक गुरु जीद्वारा हिन्दव: सोदरा सर्वे की अहम बात कही गई। जिसे आज वर्तमान सरसंघचालक डॉ मोहन भागवत जी ने कहा की हिन्दू समाज को एकात्म व्यवहारकरना चाहिए सभी समान है और एक ही है। विश्व हिंदू परिषद का समाजिकसमता निर्माण में बड़ी भूमिका है अपने निर्माण से ही व्यक्ति-व्यक्ति के मध्यकिसी भी प्रकार के भेद  को हम नकार देते है।

परिषद जहा सम्पूर्ण हिन्दू समाजका संगठन कर रहा है वही देश की अखंडता भी अपने काम का आधार आजअयोध्या में बन रहे राम जन्म भूमि मंदिर निर्माण के भूमि पूजन में देश भर के मठों– मन्दिरो से आने वाली मिट्टी एवं जल ये भारत के अखण्ड होने उस संकल्प  कोदोहराता है जिस विचार के लिए हमारे लाखों पूर्वजों ने अपना बलिदान दिया।1970 के असम जोरहाट का परिषद का सम्मेलन जहाँ भारत की प्रमुख नदियों केसाथ 49 नदियों के जल एक निर्मित जल कुंड में डाला गया, देश के एकता कीदिशा में बड़ा काम कहा जा सकता है। वही 1974 का आन्ध्रप्रदेश तिरुपति में हुएपरिषद के सम्मेलन में देश की राजनीतिक पार्टियों को हिन्दू  समाज द्वारा ये चेतादिया गी मुस्लिम तुष्टिकरण छोड़ हिन्दू  केंद्रित राजनीति भी करे, स्वामीचिन्मयानंद जी के “हिन्दू वोट बैंक” बनाने की बात करना अपने में  नई बात हीथी।  हमारी हिन्दू की पहचान में जो भारत को अपनी पुण्य भूमि मानते हुए अपनीसंस्कृति पर गौरव करता है वो हिन्दू है। ऐसे हिन्दू दुनिया में फैले है हमरी हिन्दूमन्यताओ का अनुसरण कारने वाल भी हिन्दू है ऐसे में सम्पूर्ण विश्व में फैले हिन्दू समाज को संगठित करने  हेतु 1979 में प्रयाग विदेशस्थ हिन्दूओ का सम्मेलनकिया गया दुनिया 23 देशो  के प्रतिनिधि इसमें शामिल हुए। विभिन्न राष्ट्रों मेंबसने वाले हिंदुओं के उनको राष्ट्रों में होने वाली समस्याओं आदि पर चर्चा कीगई। इसी प्रकार समाज में कुछ लोग कहते है हिन्दू महिलाओं को घर में रखनाचटा ऐसे लोगों को भी परिषद ने जवाब दिया 1969 में जहा उडुपी सम्मेलन हो याफिर विशेषकर प्रयाग का मातृ सम्मेलन जिसमें देश भर से आयी हुई मातृशक्तिने भाग लिया। दुर्गा वाहिनी जैसा महिलाओं का संगठन विश्व हिंदू परिषद का हीसंगठन है।

 परिषद ने भारत में हिन्दू समाज के जागरण हेतु तमाम यात्राए निकाली 1983 में एकत्मक यज्ञ यात्रा वही 1984 में राम जानकी यात्रा को हिन्दू समाज नेहाथो-हाथ लिया। काठमांडू से रामेश्वर की यात्रा हो या गंगा सागर से गुजरातसोमनाथ यात्रा या फिर हरिद्वार से कन्यकुमारी की इन यात्राओं ने हिन्दू समाज केभीतर अपने स्व का जागरण किया। हिन्दू समाज के गाय पवित्र है इसके लिएगोरक्षा का पूरा आन्दोलन  परिषद ने संतों के आग्रह  पर किया गया।  अयोध्या मेंप्रभु राम का भव्य मंदिर बने ये भाव तो देश और दुनिया के करोड़ों हिंदुओ के मनमें था इसे सकार रूप देने का कार्य भारत के संतो द्वारा विश्व हिंदू परिषद कोसौंपा  गया। जो आज अपनी पूर्णता की ओर बढ़  रहा है,अयोध्या में प्रभु  राम कामंदिर बड़ी तेज़ी  से आकर रूप ले रहा है।

ये परिषद के प्रति हिंदू समाज काविश्वास ही है की 95 वर्ष के हिरमाराम भी सुदूर झारखंड के जंगल में भगवानराम के मंदिर हेतु निधि समर्पण  हेतु प्रतीक्षा करते है और परिषद के कार्यकर्ताओंको बुला कर निधि  का समर्पण  करते है। उत्तराखंड में फक्कट बाबा अपनी सारीजमा पूँजी राम मंदिर के लिए समर्पित कर देते हैं। सुदूर सिक्किम में एक बूढ़ीमहिला की आख़िरी इच्छा ही राम मंदिर बनते देखना है । लद्दख एवं अरुणाचलप्रदेश के बौद्ध गोंपा हो या फिर सिख गुरु बाबा इक़बाल सिंह सभी ने मंदिरनिर्माण हेतु अपनी निधि का समर्पण किया। यह विश्वास देश के हिन्दू एवं अन्यमतावलंबियों में आज भी विश्व हिन्दू परिषद के लिए दिखता है। इसलिए जबआज लव जेहाद जैसे मुद्दे रोज़ आम देखने को आ रहे या हिन्दू  देवी-देवताओं काअपमान  होते दिखता है तो हिंदू समाज विश्व हिंदू परिषद की तरफ़ ही देखता है।

 

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