SIR को लेकर एक और आरोप यह है कि कुछ राजनीतिक दलों के “vote bank” को नुकसान पहुंचाने के लिए नाम हटाए जा रहे हैं। किसी elector की राजनीतिक पसंद electoral-roll revision के दौरान कैसे निर्धारित की जाएगी? किसी व्यक्ति का electoral roll में बने रहने का आधार उसकी वैधानिक eligibility है, न कि वह किस दल का समर्थक है।
यदि किसी particular political party के समर्थकों को targeted तरीके से हटाने का आरोप लगाया जाता है, तो केवल deletions की संख्या पर्याप्त प्रमाण नहीं होगी। दिखाना होगा कि किस आधार पर नाम हटे, क्या वही criteria समान रूप से लागू हुआ और क्या प्रमाण मौजूद है। बड़ी संख्या में नाम चिन्हित होने का मुख्य कारण मतदाताओं का अपने registered booth से Absent होना, Shifted हो जाना या मृत्यु हो जाना है। पिछले दो दशकों में बड़े पैमाने पर migration हुआ है। कई लोग अपने गांव और शहर दोनों जगह पंजीकृत हैं। 2002 के बाद शुरू हुए इस विशेष गहन पुनरीक्षण में एक से अधिक जगह पंजीकृत नामों को चिन्हित किया गया है, जो मतदाता सूची की शुद्धता बनाए रखने के लिए वैधानिक प्रक्रिया है। संविधान ECI को यह अधिकार देता है।
*“बिना पूछे नाम काटे जा रहे हैं” वाला दावा भी अधूरा है।*यहीं पर अफवाह फैलाने वालों की सबसे बड़ी कमजोरी सामने आती है। वे केवल यह दोहरा रहे हैं कि “नाम गलत तरीके से काट दिए गए”, लेकिन इस दावे को साबित करने वाले ठोस आंकड़े नहीं दे पा रहे। यदि प्रक्रिया वाकई गलत थी और eligible voters को गलत तरीके से बाहर किया गया था, तो उनके पास ये आंकड़े होने चाहिए:
– कितने claims दाखिल हुए और उनमें से कितने नाम restore हुए?
– कितनी deletion orders के खिलाफ appeals हुईं?
– कितने मामलों में अदालतों ने deletion को गलत या अवैध माना?
– कितने मामलों में appellate authority या अदालत ने नाम वापस जोड़ने का आदेश दिया?
केवल ASDD चिन्हित संख्या को “वोट कट गए” कहकर अफवाह फैलाना आसान है, लेकिन वास्तविक wrongful exclusion साबित करने के लिए claims, restorations, appeals और judicial outcomes के आंकड़े जरूरी हैं। अभी तक अफवाह फैलाने वाले इन आंकड़ों को पेश नहीं कर पाए हैं।
Election Commission ने ये सभी आंकड़े अपनी SIR bulletines ke माध्यम से समय-समय पर जारी किए हैं और उनकी जांच किसी भी स्तर पर की जा सकती है। यही अंतर Draft-stage identification और वास्तविक गलत बाहर करने के बीच है।
*क्या किसी राजनीतिक दल के वोट बैंक को निशाना बनाया जा सकता है?*



