संध्या शर्मा मिश्रा की कविताएँ…

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मुस्कुराती किताब 
हां ये सच है कि मैं उम्मीदों
से भरी मुस्कुराती किताब हूँ।
जिसके प्रत्येक पृष्ठ पर
स्याह, स्याही से लिखी मेरी
वो यादें, वो तजुर्बे, वो सपने
और कुछ ख़्याल भी हैं।
यादें, याद बनकर रह गई,
तजुर्बे कुछ सिखाकर गए और
सपने पूरे करने की कोशिश
आज भी जारी है और ये प्रश्न भी
कि नेक राह पर चलकर
कैसे पूरे किए जायें वो सपने
जो कभी सोने ही नहीं देते
हर पल बस याद दिलाते हैं
कि अभी भी देर नहीं हुई,
करते रहो निरंतर प्रयत्न,
एकदिन सफलता
सपने से निकलकर
हकीकत में बदल ही जाएगी।
और नाउम्मीदी उम्मीद बनकर
घर आयेगी।
ये पृष्ठ सदैव समझाते हैं कि
मुख्य पृष्ठ की मुस्कुराहट को
कभी कम ना होने देना,
उसे यूं ही बरकरार रखना।
किताब के अंदर चाहें कुछ भी हो
अगर मुख्य पृष्ठ पर मुस्कुराहट है
तो उम्मीद अपनी किरणों को समेटे
सुनहरे सूरज के उदय होने का
इंतजार अवश्य करती है,
और जब वो सूरज उदित होता है
तो ढेरों  प्रकाश की किरणों के साथ
उम्मीद को हकीकत में बदल देता हैं और फिर किताब के हर पृष्ठ पर
होती है सिर्फ मुस्कुराहट!
और बस मुस्कुराहट!
संघर्ष
 
सर पर ईटों का बोझ है,
आँचल ही बच्चे की गोद है,
दुनिया में एक जननी ही,
सचमुच ममता की खोज है।
नहीं निराशा मन में कोई,
ना ही तन पर कोई बोझ है,
अपने ललना के खातिर ही,
ढोती सर पर ये बोझ है।
आँखों में ऑसू सूखे हैं,
और दूध से आँचल गीला है,
होंठ प्यास से चटक रहे,
और पेट भूख से ढीला है।
ये दशा दयनीय उस माँ की है,
जिसने संसार रचा सुंदर,
सबके सुख की सोचे हरदम,
त्याग भरा केवल अंदर।
मां की ममता का मोल नहीं,
हिम्मत का भी कोई तोल नहीं,
एक माँ, नारी, पत्नी, बेटी, सब
एक रूप में घोल रही।
है नमन, मेरा ए माँ तुमको,
तुम मुंह से कुछ ना बोल रही,
पर हिम्मत, धैर्य, मेहनत तेरी,
तुझे जवाहरात में तोल रही।
क्या उपमा दूँ, क्या पदवी दूँ,
सब त्याग के आगे छोटे हैं,
देख तेरी इस हिम्मत को ,
हम नमन तुझे मां करते हैं।

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संध्या शर्मा मिश्रा

संध्या शर्मा मिश्रा

बरेली निवासी साहित्यकार संध्या शर्मा मिश्रा ने एम.ए. (हिंदी) सहित पॉलीटेक्निक इन सेक्रेटेरियल प्रैक्टिस एवं एन.टी.टी. की शिक्षा प्राप्त की। इन्होंने श्री राममूर्ति स्मारक कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी, इनवर्टिस इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज तथा आकाशवाणी बरेली में कार्य किया। विभिन्न साझा संकलनों और समाचारपत्रों में इनकी कविताएँ, कहानियाँ एवं लेख प्रकाशित हैं। भव्या फाउंडेशन, आगमन ग्रुप, सम्पर्क क्रान्ति परिवार आदि द्वारा सम्मानित।कविता, कहानी, लेख, विज्ञापन एवं स्लोगन लेखन उनकी प्रमुख रुचि है

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