सरकार युवाओं के साथ और विरोधी दल अराजक तत्वों के साथ 

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लखनऊ। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की कॉकरोच वाली टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया पर अमेरिका से उपजी कॉकरोच जनता पार्टी का 36 दिनों से चला आ रहा आंदोलन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व सरकार के हस्तक्षेप के बाद समाप्त हो चुका है। सरकार ने विभिन्न परीक्षाओें विशेषकर नीट जैसी परीक्षाओं के पेपर लीक के मुद्दे पर छात्रों की विभिन्न मांग लिया है जिसमें शिक्षा मंत्री धमेंद्र प्रधान का इस्तीफा भी शामिल है। केंद्र सरकार ने परीक्षाओं में नकल व पेपर लीक की घटनाओं  को रोकने के लिए कड़ा कानून भी संसद के पटल पर रख दिया है। केंद्र सरकार ने हाई लेवल टास्क फोर्स का गठन किया है जिसमें विभिन्न क्षेत्रों के विषय विशेषज्ञ हैं। पेपर लीक सम्बन्धी अपराधों के लिए फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन भी हो चुका है। सरकार पूरी तत्परता और ईमानदारी से इस समस्या के समाधान में लगी है। प्रधानमंत्री जी स्वयं युवाओं से सीधे संवाद कर रहे हैं।

विपक्ष इस मुद्दे पर नई -नई मांगें रखकर संसद में हंगामा कर रहा है, चर्चा से भाग रहा है तथा सोशल मीडिया के माध्यम से छात्रों को एक बार फिर भड़काने का प्रयास कर रहा है।

स्पष्ट है कि जहाँ प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व वाली सरकार आदोलनरत युवाओं की समस्याओ के त्वरित समाधान व उनके उज्जवल भविष्य की सुरक्षा के लिए उनके साथ खड़ी है वहीं  कांग्रेस नेता राहुल  गांधी, प्रियंका वाड्र्रा व अन्य इंडी गठबंधन के नेता सोशल मीडिया पर अफवाहें फैलाकर तथा झूठ बोलकर केवल समस्या को ही बढ़ा  रहे हैं।

केंद्र सरकार ने कॉकरोच जनता पार्टी से सीधा संवाद स्थापित किया। आन्दोलन स्थल जंतर मंतर पर काफी संख्या में अराजक तत्व उपस्थित थे और प्रधानमंत्री मोदी को गंदी गालियां दे रहे थे, इन परिस्थितियों में भी सरकार ने छात्रों से संवाद स्थापित किया। सबसे पहले अनशन पर बैठे आंदोलन जीवी  सोनम वांगचुक का अनशन समाप्त करवाया गया। अपने शिक्षा मंत्री का इस्तीफा लिया गया । छात्रों की मांगें मानी । छात्र आंदोलन समाप्त कर वापस चले गए।अब विरोधी दलों को बेचैनी है कि अगर कहीं प्रधानमंत्री मोदी अपने प्रयासों में सफल हो गए तो इस मुद्दे पर मोदी सरकार गिराने की साजिश धरी रह जाएगी। यही कारण है कि यह लोग सदन नहीं चलने दे रहे हैं। इसी बीच राहुल गांधी ने छात्रों को भड़काने के लिए एक बेहद आपत्तिजनक पोस्ट किया है कि बीजेपी किसी न किसी प्रकार छात्रों का दमन और उन पर अत्याचार करेगी ही। राहुल गांधी व कांग्रेस व इंडी गठबंधन के अन्य नेताओं की बयानबाजी से उनका मंतव्य स्पष्ट हो रहा है कि वे केवल सत्ता प्राप्ति के लिए देश में अराजकता का वातावरण बना रहे हैं। राहुल गांधी, अरविंद केजरीवाल व अन्य क्षेत्रीय दलों के नेता जिनका राजनैतिक अस्तित्व अब समाप्ति की ओर है अभिजीत दिपके की आड़ में अपनी राजनैतिक रोटियां सेंक रहे हैं । इनमें महाराष्ट्र के उद्धव ठाकरे व राज ठाकरे तथा बिहार के राजद जैसे दलों को भी आनंद आ रहा है।

सरकार ने नीट जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं को पेपर लीक सहित दूसरी गड़बड़ियों से बचाने के लिए 2024 के अपने ही कानून को और कड़ा बनाने का प्रावधान किया है। लोकसभा में केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने एंटी पेपर लीक बिल विपक्ष के भारी हंगामे के बीच पेश कर दिया है। इस प्रस्तावित कानून संशोधन के तहत हर राज्य में पेपर लीक के मामले की सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनेंगे, जहां प्रतिदिन सुनवाई होगी और 90 दिन के अंदर ट्रायल पूरा कर निर्णय सुना दिया जाएगा। 2024 के कानून में जहां पहले 3 से  5 साल तक की सजा का प्रावधान था उसे नए संशेाधन बिल के अनुसार 5 से 10 कर दिया जाएगा। इसी प्रकार 2024 के कानून  में जहां 10 लाख जुर्माना लगाया जाता था उसे बढ़ाकर 10 करोड़ रुपए करने का प्रस्ताव है।

प्रधानमंत्री मोदी ने 23 जुलाई की मध्यरात्रि में इन्स्टा ग्राम पर आकर अपनी बात रखी। पेपर लीक रोकने के लिए नया कानून लाने की बात कही और 24 जुलाई को जेन -जी को समर्थन करने के लिए धन्यवाद कहा। 26 जुलाई को एक नया वीडियो जारी कर उन्होंने हाई पावर टास्क फोर्स के गठन की घोषणा की। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने वीडियो संदेश में बताया कि नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता वाली 6 सदस्यीय यह कमेटी सरकार को पेपर लीक रोकने के सुझाव देगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्पष्ट कर चुके हैं कि पेपर लीक के दोषियों को छोड़ा नही जाएगा।

सरकार ने शिक्षा मंत्री का त्यागपत्र लेने के साथ ही  नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) के 47 अधिकारियों को भी बर्खास्त कर दिया है। इन हटाए गए अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज करने की तैयारी चल रही है। एनटीए में अब युवा पेशेवरों की भर्ती राधाकृष्णन कमेटी के सुझावों के आधार पर होगी।

यदि विरोधी दलो के सांसद अब भी हंगामा जारी रखते है तो वह केवल सदन व देश की जनता का समय और धन बरबाद करनेवाली विकृत मानसिकता की राजनीति ही होगी। इससे यह बात भी स्पष्ट हो जाएगी कि विपक्ष केवल छात्रों की आड़ में भारत को अराजकता की आग में झोंकना चाहता है।लोकतान्त्रिक प्रक्रिया में बार-बार पराजित होने के बाद यह लोगभारत को बांग्लादेश, श्रीलंका व नेपाल जैसी परिस्थितियों की ओर धकेलना  चाहते हैं।

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मृत्युंजय दीक्षित

मृत्युंजय दीक्षित

मृत्युंजय दीक्षित का लखनऊ में निवास है। वे लेखक, स्वतंत्र पत्रकार एवं स्तम्भकार हैं

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