लखनऊ: सोलर एनर्जी के क्षेत्र में लखनऊ ने एक नया कीर्तिमान स्थापित कर दिया है। देश की राजधानी दिल्ली को छोड़ दें तो अब लखनऊ सोलर पैनल कैपेसिटी में पूरे भारत का टॉप शहर बन गया है। सूरत को पछाड़कर लखनऊ ने न सिर्फ रिकॉर्ड बनाया है, बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश को सोलर क्रांति का प्रतीक बना दिया है। वर्तमान में लखनऊ की कुल ऊर्जा डिमांड की लगभग 15 प्रतिशत आपूर्ति सोलर पावर से हो रही है। यह उपलब्धि महज संख्याओं की नहीं, बल्कि मोदी सरकार और योगी सरकार के साझा प्रयासों की जीत है, जो ऊर्जा स्वावलंबन और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हो रही है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदर्शी नीतियों और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कुशल क्रियान्वयन ने उत्तर प्रदेश को सोलर किंग बनाने की नींव रखी है। पीएम सूर्य घर मुफ़्त बिजली योजना इस क्रांति का मुख्य स्तंभ है। अप्रैल 2026 तक लखनऊ में 88,000 से अधिक रूफटॉप सोलर सिस्टम इंस्टॉल हो चुके हैं, जो पूरे देश में सबसे अधिक हैं। इससे पहले गुजरात का सूरत इस क्षेत्र में अग्रणी था, लेकिन लखनऊ ने उसे पीछे छोड़ दिया। केवल मई में ही लखनऊ ने सबसे अधिक इंस्टॉलेशन दर्ज किए। पूरे उत्तर प्रदेश में अब 3.5 लाख से अधिक घरों पर सोलर पैनल लग चुके हैं, जिनकी कुल क्षमता 385 MW से अधिक है। राज्य स्तर पर रूफटॉप सोलर क्षमता 1,888 MW तक पहुंच गई है, और केंद्र से 3,602 करोड़ रुपये तथा राज्य से अतिरिक्त 1,200 करोड़ रुपये की सब्सिडी लाभार्थियों को दी जा चुकी है।
इस उपलब्धि के पीछे केंद्र और राज्य सरकारों का समन्वय है। मोदी सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाएं जैसे PM-KUSUM, सूर्य घर और राष्ट्रीय सोलर मिशन ने आधार तैयार किया, जबकि योगी सरकार ने इसे जमीन पर उतारा। UP NEDA (उत्तर प्रदेश नवीकरणीय ऊर्जा विकास अभिकरण) की सक्रिय भूमिका, जागरूकता अभियान, आसान लोन सुविधाएं, नेट मीटरिंग और आकर्षक सब्सिडी ने आम नागरिकों को सोलर अपनाने के लिए प्रेरित किया। घरेलू उपभोक्ताओं को जीरो बिलिंग का सपना अब हकीकत बन रहा है। एक सामान्य घर पर 3-5 kW का सिस्टम लगने से मासिक बिजली बिल शून्य हो जाता है और अतिरिक्त बिजली ग्रिड को बेचकर अतिरिक्त आय भी हो रही है।
उत्तर प्रदेश सोलर क्षमता में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। 2020-21 में मात्र 415 MW से बढ़कर 2025-26 में यह 1,979 MW और अब 5 GW से अधिक हो चुकी है – यानी छह साल में पांच गुना वृद्धि। राज्य का लक्ष्य 2026-27 तक 22 GW सोलर क्षमता हासिल करना है। फ्लोटिंग सोलर प्लांट्स, ग्राउंड माउंटेड प्रोजेक्ट्स, किसानों के लिए KUSUM पंप और औद्योगिक छतों पर सोलर इंस्टॉलेशन इस अभियान को गति दे रहे हैं। लखनऊ के अलावा अन्य शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में भी सोलर दीदी जैसी पहल महिलाओं को उद्यमी बनाकर रोजगार सृजन कर रही हैं।
पर्यावरणीय और आर्थिक लाभ स्पष्ट हैं। सोलर से CO2 उत्सर्जन में भारी कमी आ रही है, कोयला निर्भरता घट रही है और ऊर्जा सुरक्षा मजबूत हो रही है। किसान बिजली बिल से मुक्त होकर आय बढ़ा रहे हैं। औद्योगिक क्षेत्र में विश्वसनीय बिजली आपूर्ति से निवेश आकर्षित हो रहा है। लखनऊ का मॉडल अब पूरे देश के लिए उदाहरण बन गया है।
हालांकि चुनौतियां भी हैं – जैसे स्टोरेज टेक्नोलॉजी, मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ाना और पॉलिसी स्थिरता। लेकिन मोदी-योगी की डबल इंजन सरकार इनका समाधान भी ढूंढ रही है। मेक इन इंडिया के तहत सोलर मॉड्यूल निर्माण बढ़ रहा है, जो आयात पर निर्भरता कम करेगा।
उत्तर प्रदेश सोलर किंग बनने की राह पर है। यह न सिर्फ ऊर्जा क्रांति है, बल्कि आत्मनिर्भर भारत और स्वच्छ भारत का प्रतीक है। जब हर छत सूर्य को ऊर्जा स्रोत बनाएगी, तब सच्चा सूर्योदय होगा। लखनऊ का यह कीर्तिमान साबित करता है कि सही इरादे, सही नीतियां और सही क्रियान्वयन से असंभव भी संभव हो जाता है। भविष्य सौर ऊर्जा का है और उत्तर प्रदेश उसका नेतृत्व कर रहा है।



