नमस्कार मित्रों,
अभी एम्स आयुर्वेद अस्पताल में भी हूं। आंतों की स्थिति में कोई ऐसा सुधार नहीं है जिससे आत्मविश्वास लौटे। यहां सिटी स्कैन, कोलोनोस्कोपी, एंडोस्कोपी में मिलाकर डॉक्टर का निष्कर्ष है कि आंतों में कहीं – कहीं एरोजन और गैस्ट्राइटिस है। हिंदी में उसका अर्थ लगाया जा सकता है। मुझे हमेशा कष्ट बहुत ज्यादा रहा है लेकिन रिपोर्ट में कभी उतना नहीं आता है। इस कारण डॉक्टर भी जल्दी नहीं समझ पाते।
डॉक्टर कह रहे हैं कि आपको कुछ दिनों के लिए कल डिस्चार्ज करेंगे लेकिन फिर से आकर एडमिट होना पड़ेगा । ऐसा कई बार करना होगा। तब शायद स्थिति ठीक हो सकती है। यह मेरे लिए अत्यंत कठिन है।
पेट के बाएं भाग में मध्य के थोड़ा नीचे लंबे समय से मेरी समस्या रही है। वही एक जगह है जहां लगता है कुछ पकड़ लिया है, वहीं से लैट्रिन, वहीं से दर्द, वहीं से गैस का रुकना और फिर पूरा शरीर सिर से पर तक डिस्टर्ब होता रहा है। मैं डॉक्टर को बताता भी था लेकिन आज तक किसी की समझ में नहीं आया। आश्चर्य की बात है किज्ञ2020 में मेरा अंतिम टेस्ट एम्स में हुआ था और उसमें भी कोलोनोस्कोपी में बहुत हल्के डायवर्टिकुलेट्स बताए गए थे जिसे उस समय के विभाग के प्रमुख डॉक्टर अनूप हराया जी ने कहा कि यह कोई बड़ी बीमारी नहीं। डॉक्टर वही बताते हैं जो टेस्ट कहता है और उन्होंने नॉर्मल जीवन जीने की सलाह दी जो संभव नहीं हो पाया। लंबी भाग दौड़ के बाद मेरे एलोपैथ छोड़ दिया। नेचुरोपैथी एवं आयुर्वेद की शरण में गया।
मेरे जैसे देश के लिए काम करने वाले अनेक लोगों की दिक्अत यह होती है कि व्यक्तिगत जीवन में अकेले होने के कारण आपकी समस्या का किसी को पूरा पता नहीं होता। आपको जानने वाले लाखों होंगे, समर्थन विरोध करेंगे सम्मान भी करेंगे, मिलने – जुलने साथ बैठने वाले भी होंगे, लेकिन कोई यह महसूस नहीं करेगा कि हमारे इनके प्रति हमारी जिम्मेदारी भी है। फिर आपके साथ कोई एक परिपक्व समझदार आदमी स्थायी रूप से नहीं है जो आपके खाने-पीने से लेकर बाकी व्यवस्था देखें तो आपके लिए अत्यंत कठिन स्थिति पैदा हो जाती है। सब कुछ होते हुए आपकी स्थिति बिगड़ती है और संभालने वाला कोई नहीं होता। मुझे इस बार भी अपने भाई राम कुमार को फोन करना पड़ा और उनके साथ राकेश कुमार जी आए, मेरी बहन आई और एडमिट हुआ। लेकिन अगले कम से कम 6 महीने बहुत ही प्रतिबद्ध केयर, खान-पान , देखभाल ,मॉनेटरिंग और उपचार की आवश्यकता है।
कोशिश जारी है। आगे परमात्मा की इच्छा।



