प्रमोद भार्गव को मिलेगा सूरतगढ़ में लक्ष्मणराम सेवटा स्मृति कथा सम्मान

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शिवपुरी।भाषा, साहित्य, संस्कृति, कला एवं सामाजिक जागरण को समर्पित संस्था विविधा, सूरतगढ़ राजस्थान की ओर से प्रतिवर्ष दिए जाने वाले सम्मानों की घोषणा की गई है। संस्था के संस्थापक अध्यक्ष डॉ एनके सोमानी ने बताया कि साल 2024-25 के लिए स्व. श्री लक्ष्मण राम सेवटा स्मृति कथा सम्मान प्रमोद भार्गव (शिवपुरी मध्य प्रदेश) को उनके कथा संग्रह ‘प्रमोद भार्गव की चुनिंदा कहानियां’ पर दिया जाएगा।प्रमोद को हाल ही में इसी कथा संग्रह पर महाराष्ट्र के नासिक में विद्योत्तमा सम्मान भी मिला है।मार्च के अंत में राजस्थान के सूरतगढ़ में भव्य समारोह में इस सम्मान के अंतर्गत 11,000 हजार की राशि,स्मृति चिन्ह, प्रशस्ति पत्र शॉल और श्रीफल भेंट लिए जाएंगे।

प्रमोद भार्गव के अलावा कृष्णा देवी कामरा स्मृति हिंदी कविता सम्मान डॉ प्रभा मुजुमदार (गुजरात) को उनके कविता संग्रह ‘नकारती हूं निर्वासन’ पर दिए जाने का निर्णय लिया गया है। राजस्थानी कविता के क्षेत्र में दिया जाने वाला श्रीमती गोपी देवी चांडक स्मृति सम्मान चांदकौर जोशी (जोधपुर )को उनके कविता संग्रह ‘बिलखता बादल’ को, जुगल किशोर सोमानी स्मृति व्यंग पुरस्कार वरिष्ठ व्यंगकार अखिलेश श्रीवास्तव (लखनऊ) को उनके व्यंग्य संग्रह ‘दफ्तरनामा’पर दिया जाएगा। उपन्यास के क्षेत्र में दिया जाने वाला भेरूदान सोमानी स्मृति उपन्यास पुरस्कार अलंकार रस्तोगी (लखनऊ) को उनके उपन्यास ‘पंडित भया न कोई’ तथा अर्जुन राम सुथार स्मृति प्रथम प्रकाशित पुस्तक पुरस्कार डॉ नेहल शाह(भोपाल) को उनकी पहली कविता पुस्तक ‘और इन सब के बीच’ पर दिया जाएगा । संस्था के सचिव संजय कामरा ने चयनित साहित्यकारों को बधाई दी और कहा कि सभी साहित्यकारों को मार्च माह के अंत तक आयोजित होने वाले भव्य समारोह में सम्मानित किया जाएगा।

मैंने कहा न लिखने पढ़ने का काम बहुत चुनौती का काम है

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हितेन्द्र

कोलकाता। लिखना पढ़ना बहुत ही चुनौती भरा काम है । बहुत खून पसीना बहाना पड़ता है । कई फ्रंटों पर लड़ना भी पड़ता है ।
हमारे जनरेशन की एक और समस्या है जिसपर ध्यान देना चाहिए । हमलोग ग़लत धारणाओं का बोझ बहुत आत्मविश्वास से ढोते रहे । अब जब इन धारणाओं की बिखरते हुए देखते हैं तो समझ में नहीं आता कि अपने विश्वासों की रक्षा कैसे करें ।

विश्वास ग़लत नहीं था । दुनिया को बेहतर बनाने का ख़्वाब तो सही है । जो पीछे हैं , मजबूर हैं उनके साथ खड़े होना तो हमारा दायित्व है ही ।
दिक़्क़त थी ग़लत मार्गदर्शन की ।

उनके बारे में जान जाने के बाद या तो चुप रहिए कुछ बोलिए नहीं या फिर साहस पूर्वक अपनी बात को कहिए और इस क्रम में अपने विरुद्ध भी बोलिए । यह आसान नहीं होता ।

सामने आई पीढ़ी कमजोर नहीं है लेकिन उनके पास यथार्थ नहीं है । जीवन बोध भी कुछ संकीर्ण है । उनसे बातें करते हुए लगता ही नहीं है कि सामाजिक बोध उनके भीतर ठीक से प्रतिष्ठित है ।

हमलोगों को बहुत बेहतर शिक्षक मिले थे जबकि हमलोग सरकारी संस्थानों और पुस्तकालयों में पढ़े लिखे । आज के युवा लोग हमारी पीढ़ी से बहुत कुछ सीख सकती थी अगर सामाजिक स्पेस को हम बचा सके होते ।

अपनी पीढ़ी के अधिकतर लोगों को अपने अपने बाल बच्चों की चिंता में ही फँसा देखता हूँ । उनके पास समय और संसाधन सिर्फ़ परिवार के लिए है ।
इसलिए सरकारी संस्थान और सामाजिक स्पेस सब ढहते जा रहे हैं ।

हमलोग मूक दर्शक बने हुए हैं ।

लिखने पढ़ने का काम करने वाले तभी कुछ कर सकेंगे जब उनपर ध्यान देने वाले लोग बचेंगे और बढ़ेंगे ।

वही तो कम होती जा रही है ।

तसल्ली के लिए किसी समारोह में जाकर कुछ बोल आए कोई, तस्वीर साझा कर ले या कहीं कविता पाठ कर आए लेकिन यह बिल्कुल स्पष्ट है कि अंतर नहीं पड़ता ।

मैंने कहा न लिखने पढ़ने का काम बहुत चुनौती का काम है । यह सुविधा से किया जाने वाला काम नहीं है । यह चैरिटी का काम नहीं है ।

एआई सम्मेलन – भारत की अभूतपूर्व सफलता और व्यथित कांग्रेस

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नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित एआई शिखर सम्मेलन में आए विश्व के बड़े बड़े नेता इस पहल से अचंभित थे और भारत की प्रगति की प्रशंसा करते नहीं थक रहे थे। बड़ी बड़ी एआई कंपनियां व निवेशक भारत के साथ समझौते कर रही थीं। जन सामान्य गर्वित हो रहा था क्योंकि यहाँ भारत की युवा प्रतिभाओं की सराहना हो रही थी। सदा से ही राष्ट्र विमुख रही कांग्रेस पार्टी से ये देखा नहीं गया और उनके कुछ चुनिंदा कार्यकर्ता वहां अर्धनग्न होकर प्रदर्शन करने पहुँच गए। वास्तव में अब कांग्रेस पार्टी अब प्रधानमंत्री मोदी व भाजपा का विरोध करते -करते पूरी तरह भारत विरोधी हो गई है।

कांग्रेस का यह विरोध ऐसा ही था जैसे जब प्राचीन काल में जब ऋषि गण अपने आश्रमो मे किसी अच्छे कार्य के लिए यज्ञादि करते थे तो कुछ राक्षस उस यज्ञ को अपवित्र करने के लिए यज्ञकुंड में हड्डियां डालकर उसे अपवित्र करने का प्रयास करते थे। कांग्रेस ने जो कृत्य विदेशी मेहमानों के समक्ष किया है उससे स्पष्ट है कि कांग्रेस घोर अराजकतावादी बन चुकी है जिसकी अब सारी उम्मीदें समाप्त होती जा रही हैं।

एआई समिट कांग्रेस द्वारा की गई इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना से भारत का जेन- जी भी नाराज़ है जिसको भड़काकर कांग्रेस सड़क पर लाना चाहत है। भाजपा कांग्रेस द्वारा दिए गए इस अवसर को गंवाना नहीं चाहती । पार्टी की तरफ से संपूर्ण भारत में कांग्रेस कर्यालयों के बाहर धरना -प्रदर्शन आयोजित हो रहे हैं। मेरठ में आयोजित एक कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मोदी भी कांग्रेस पर हमलावर हुए ओैर कहा कि कांग्रेस ने एआई समिट को अपनी नग्न राजनीति का अखाड़ा बना दिया है। उन्होंने कांग्रेस से पूछा कि देश तो जानता ही है कि आप पहले से ही नंगे हो फिर कपड़े उतारने की जरूरत क्यों पड़ी? यह दिखाता है कि देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस अब वैचारिक रूप से कितनी दिवालिया और दरिद्र हो गई है। प्रधानमंत्री मोदी ने मीडिया से अपील करते हुए कहा कि जब मैं कांग्रेस की आलोचना करता हूं तो ऐसी सुर्खियां न चलाएं कि मोदी ने विपक्ष पर हमला बोला। कांग्रेस को बचाने की ये चालाकियां बंद करें।

इस पूरे घटनाक्रम में कांग्रेस को सपा बसपा सहित कई अन्य छोटे क्षेत्रीय दलो का समर्थन नहीं मिला है जिनको कांग्रेस इंडी ब्लॉक की पार्टियाँ कहती है। कांग्रेस के इस कृत्य का लालू यादव की पार्टी राजद ने भी कड़ा विरोध किया है। जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी विरोध किया है। कांग्रेस ने इस तरह का प्रदर्शन करके सहयोगी दलों के बीच भी अपनी फजीहत करवा ली है। आगामी समय में यह दल कांग्रेस से दूरी बनाने पर विचार भी कर सकते हैं यही कारण हे कि इन सभी दलों की प्रधानमंत्री मोदी ने सराहना की है।

कांग्रेस के नेता और प्रवक्ता जिस प्रकार टी वी चैनलों व सोशल मीडिया पर इस हरकत को सही ठहरा रहे हैं उससे स्पष्ट है कि यह कांग्रेस पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व की ही योजना थी। उनका कहना है कि लोकतंत्र मे अपनी बात कहने और सरकार का विरोध करने का अधिकार सबको है, उन्होंने अपने संवैधानिक अधिकारों का प्रयोग किया है। कांग्रेसी कार्यकर्ताओं की इस हरकत से पुराने परंपरागत कांग्रेसी से भी खुश नहीं हैं और अपनी नाराजगी व्यक्त कर रहे है। पुराने कांग्रेस नेताओं को इस घटना से कोई हैरानी नहीं है अपितु उनका कहना है कि यह बदली हुई कांग्रेस की बदलती हुई संस्कृति की निशानी है। कांग्रेस नेता शशि थरूर भी एआई समिट को अत्यंत सफल आयोजन बता रहे हैं और कांग्रेस के अर्धनग्न प्रदर्शन की निंदा कर रहे हैं। दरअसल प्रधानमंत्री मोदी की छवि को नुकसान पहुंचाने के चक्कर में कांग्रेस ने भारत की छवि व भारतीय संस्कृति को नुकसान पहुंचाया और इस तरह होली के स्वागत में अपने मुंह पर ही कालिख मल ली।

कांग्रेस के नेताओं की दिली इच्छा रही है कि किसी न किसी प्रकार से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व भारत की छवि को पूरी दुनिया में खराब किया जाए और भारत में बांग्लादेश व नेपाल जैसी अराजकता का वातावरण पैदा कर अपना स्वार्थ सिद्ध किया जाए किंतु उसका यह सपना पूरा नहीं हो पा रहा है और यही कारण है कि कांग्रेस हताश होकर नंगी राजनीति पर उतर आई है।

एक साधारण तस्वीर, एक बड़ा विवाद

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दिल्ली। आजकल सोशल मीडिया और राजनीति का मेल इतना गहरा हो गया है कि एक मामूली सी फोटो भी किसी की छवि को धूमिल करने का हथियार बन जाती है। हाल ही में प्रयागराज के एडिशनल पुलिस कमिश्नर आईपीएस अजय पाल शर्मा की एक तस्वीर वायरल हुई, जिसमें वे हवाई चप्पल पहने, प्लास्टिक के सादे स्टूल पर रखे छोटे से केक को काटते नजर आ रहे हैं। उनके इर्द-गिर्द कुछ लोग खड़े हैं, माहौल बिल्कुल सामान्य-सा उत्सव वाला लगता है-शायद किसी जन्मदिन या छोटे समारोह का। लेकिन इसी तस्वीर को ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने मीडिया के सामने पेश कर गंभीर आरोप लगा दिए। उनका कहना है कि यह फोटो साबित करती है कि अजय पाल शर्मा शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी से मिले हुए हैं, और उनके खिलाफ चल रही जांच (जिसमें यौन शोषण जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं) निष्पक्ष नहीं हो सकती।

तस्वीर देखकर सच में लगता है—क्या इतना ही काफी है किसी को अपराधी साबित करने के लिए? एक पुलिस अधिकारी का किसी के साथ केक काटना, वो भी अनौपचारिक माहौल में, क्या इसे सीधे मिलीभगत या साजिश का सबूत मान लिया जाए? यह फोटो किसी बड़े भ्रष्टाचार, रिश्वत या गैरकानूनी काम की नहीं है-बस एक सामान्य उत्सव की है। फिर भी इसे हथियार बनाकर अफसर की ईमानदारी पर सवाल उठाए जा रहे हैं। शंकराचार्य ने इसे प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिखाकर कहा कि ”हिस्ट्रीशीटर के साथ पुलिस अफसर बर्थडे मना रहा है, तो जांच कैसे निष्पक्ष होगी?” 

यह घटना आज की राजनीति की कड़वी सच्चाई दर्शाती है। जहां असहमति या विरोध को व्यक्त करने के बजाय, चरित्र हनन और बदनामी का रास्ता अपनाया जा रहा है। “देखो, किसके साथ खड़ा है” या “इसके साथ फोटो है”—बस इतना ही काफी हो जाता है किसी को बदनाम करने के लिए। कोई सबूत की गहराई नहीं देखता, कोई संदर्भ नहीं तलाशता। बस एक क्लिक, एक शेयर, और विवाद तैयार।

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद जी पहले से ही राजनीतिक बयानबाजी और सक्रियता के लिए चर्चित हैं। वे दिन-रात राजनीति करते दिखते हैं-कभी सत्ता पर सवाल, कभी जांच पर आरोप। अगर राजनीति में इतना रुचि है, तो खुलकर मैदान में क्यों नहीं आते? योगी आदित्यनाथ की तरह कोई पार्टी जॉइन कर लें, चुनाव लड़ें, सत्ता में आएं और सिस्टम को अपने तरीके से सुधारें। लेकिन बाहर रहना और दूसरों की छवि खराब करना आसान रास्ता है। यह न तो आध्यात्मिक गरिमा के अनुरूप है, न ही लोकतंत्र की।

समाज में ऐसी घटनाएं बढ़ रही हैं, जहां बिना ठोस आधार के लोगों को बदनाम किया जाता है। पुलिस, न्यायपालिका या प्रशासन पर विश्वास कम हो रहा है, क्योंकि हर मुद्दे को राजनीतिक रंग दिया जा रहा है। आईपीएस अजय पाल शर्मा एक अधिकारी हैं-उनकी जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठाना एक बात है, लेकिन एक साधारण तस्वीर से उन्हें ‘मिला हुआ’ घोषित करना पूरी तरह अन्यायपूर्ण है।
अगर हम ऐसी राजनीति को बढ़ावा देते रहे, तो कल कोई भी तस्वीर-चाहे कितनी भी इनोसेंट हो-किसी की जिंदगी बर्बाद कर सकती है। समय है कि हम तथ्यों पर ध्यान दें, संदर्भ समझें और बदनामी की इस गंदी राजनीति को रोकें। अन्यथा, सम्मान और सत्य दोनों खतरे में पड़ जाएंगे।

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