डीयू के हरि मंदिर स्थित अभाविप के निवास पर NSUI कार्यकर्ताओं ने किया हमला; पकड़े गए हमलावर NSUI कार्यकर्ता को पुलिस को सौंपा गया

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नई दिल्ली: दिल्ली विश्वविद्यालय में लोकतांत्रिक छात्र राजनीति को हिंसा के जरिए प्रभावित करने का एक और गंभीर मामला सामने आया है। हरि मंदिर स्थित अभाविप कार्यकर्ताओं के निवास पर NSUI कार्यकर्ताओं ने हमला किया, जहां अभाविप कार्यकर्ताओं के साथ छात्रा कार्यकर्ता भी ठहरी हुई थीं। अभाविप कार्यकर्ता शांतिपूर्वक बैठक कर रहे थे और किसी प्रकार का कोई उकसावा नहीं था। इसके बावजूद बाहर से आए NSUI कार्यकर्ताओं ने बैठक पर हमला किया। हमले के बाद अन्य लोग मौके से भाग गए, जबकि एक हमलावर को अभाविप कार्यकर्ताओं ने पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया।

अभाविप दिल्ली के प्रदेश मंत्री सार्थक शर्मा ने कहा, “NSUI को जवाब देना चाहिए कि उसके कार्यकर्ता अभाविप कार्यकर्ताओं के निवास तक क्यों पहुंचे और वहां छात्रा कार्यकर्ताओं की मौजूदगी के बावजूद हमला क्यों किया गया? हमने किसी को उकसाया नहीं था। हम शांतिपूर्वक अपनी बैठक कर रहे थे और NSUI कार्यकर्ता बाहर से आकर हमला करने पहुंचे। हमले के बाद भाग रहे एक व्यक्ति को पकड़कर अभाविप कार्यकर्ताओं ने पुलिस के हवाले किया। अभाविप ने कानून अपने हाथ में नहीं लिया, बल्कि पकड़े गए व्यक्ति को पुलिस को सौंपा। पकड़े गए व्यक्ति ने स्वीकार किया है कि वह NSUI का सोशल मीडिया कैडर है। अब कांग्रेस-IYC-NSUI को यह स्पष्ट करना होगा कि उसका सोशल मीडिया कैडर अभाविप कार्यकर्ताओं के निवास पर हमला करने क्यों पहुंचा। जब विद्यार्थियों के बीच संवाद और समर्थन के लिए कार्यकर्ता नहीं मिलते, तब कांग्रेस-IYC-NSUI की राजनीतिक मशीनरी को छात्र राजनीति में उतारना और उसके बाद हिंसा का सहारा लेना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। दिल्ली विश्वविद्यालय के विद्यार्थी यह देख रहे हैं कि एक ओर अभाविप कार्यकर्ता विद्यार्थियों के बीच लोकतांत्रिक तरीके से संवाद कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस-IYC-NSUI से जुड़े लोग अभाविप के निवास तक पहुंचकर हमला कर रहे हैं। कांग्रेस नेतृत्व को भी स्पष्ट करना चाहिए कि उसकी युवा और छात्र इकाइयों की गतिविधियों के लिए उसकी राजनीतिक जवाबदेही क्या है। अभाविप किसी भी हिंसक दबाव के सामने झुकने वाली नहीं है। पुलिस पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच कर हमले में शामिल सभी लोगों के विरुद्ध कठोरतम कानूनी कार्रवाई करे और दिल्ली विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों की सुरक्षा सुनिश्चित करे। इस बात की पुष्टि स्थानीय पुलिस से की जा सकती है।”

16 से 30 सितंबर तक विविध कार्यक्रमों और प्रतियोगिताओं का आयोजन

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अनुराग पुनेठा

नई दिल्ली : इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र (आईजीएनसीए) में हिन्दी पखवाड़ा के आयोजनों का बुधवार को उत्साहपूर्ण और गरिमामय वातावरण में शुभारंभ हुआ। केन्द्र के राजभाषा विभाग द्वारा 16 से 30 सितंबर तक आयोजित किए जा रहे हिन्दी पखवाड़ा कार्यक्रम का उद्घाटन सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी ने किया। इस अवसर पर आईजीएनसीए के डीन एवं कलाकोश प्रभाग के अध्यक्ष प्रो. सुधीर लाल, कलानिधि एवं जनपद सम्पदा एवं कलानिधि प्रभाग के अध्यक्ष प्रो. के. अनिल कुमार, राजभाषा विभाग के निदेशक डॉ. अजीत कुमार, जितेन्द्र कुमार ने भी अपने विचार व्यक्त किए। सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी ने केन्द्र के अधिकारियों एवं कर्मचारियों से हिन्दी में काम करने का आग्रह करते हुए एक अपील भी जारी की। इसके बाद नीति आयोग की वरिष्ठ हिन्दी अनुवाद अधिकारी सुश्री तपोजा दत्ता और उनके सनूह ने मनमोहक ओडिसी नृत्य प्रस्तुत कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। हिन्दी पखवाड़ा के अंतर्गत हिन्दी के प्रयोग, लेखन और रचनात्मक अभिव्यक्ति को प्रोत्साहित करने के लिए विभिन्न कार्यक्रमों, कार्यशालाओं और प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जा रहा है।

इस अवसर पर सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी ने कहा, हर साल कुछ आंकड़े हम लोग भरते हैं और वो आंकड़े हमलोग जहां पहुंचाना है, वहां पहुंचाते भी हैं। लेकिन प्रश्न यह उठता है कि क्या सिर्फ आंकड़े भरने से काम पूरा हो जाता है या कहीं न कहीं हमारे काम करने की प्रवृत्ति में, काम करने की वृत्ति में, काम करने के तरीकों में कहीं परिवर्तन आता है? क्या कहीं हमारे सोच में कोई परिवर्तन आता है? इस बारे में भी हम सबको आत्ममंथन करना चाहिए। हम सभी जानते हैं कि भाषाएं जो हैं, हमें सांस्कृतिक रूप से समृद्ध करती हैं। हमारी अभिव्यक्ति का माध्यम हैं, हमारे संप्रेषण का माध्यम है। इसलिए अगर हम हमारी भाषा को समृद्ध नहीं करेंगे तो निश्चित तौर पर हम धीरे धीरे एक बार फिर से बौद्धिक गुलामी की गिरफ्त में आते चले जाएंगे।

उन्होंने आगे कहा, आज आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस युग में बहुत सारी बातें अब सहज होती चली जा रही हैं, अनुवाद भी बहुत सरल हो गया है। लोग कोई भी चीज़ अंग्रेजी से हिंदी में कुछ ही सेकेंड में करके रख देते हैं। यह भी अपने आप में बड़ी चिंता की बात है कि उसके लिए भी व्यक्ति को अब दिमाग लगाना नहीं पड़ता। कोई और दिमाग लगाता है, किसी और के दिमाग से हम काम करते हैं। कई बार ऐसा भी होता है कि हम उसमें सही-गलत का भी परीक्षण नहीं कर पाते। धीरे धीरे अगर यही प्रवृत्ति हमारे अंदर घर कर गई तो निश्चित तौर पर एक समय ऐसा आयेगा कि हम भाषा के सही प्रयोग को भूलते चले जाएंगे। वर्तनियां है, अनुस्वार है, कहां किस चीज का प्रयोग होना है, किस चीज की ध्वनि कैसे निकलती है, इन सब बातों के बारे में हमारी चेतना धीरे-धीरे शून्य होती चली जायेगी। और जब हमारी चेतना धीरे धीरे शून्य होती चली जायेगी। एक तरह से हम उसी यंत्र के समान हो जाएंगे, जिस यंत्र का प्रयोग हम आज कर रहे हैं। वह हमारे लिए बहुत घातक होगा।

डॉ. सच्चिदानंद जोशी ने अपनी बात का समापन करते हुए कहा, हमारी भाषा हमारी संस्कृति की अभिव्यक्ति का सर्वश्रेष्ठ माध्यम है। इसलिए अगर हम हमारी भाषा को पुष्ट रखेंगे, समृद्ध करेंगे तो निश्चित तौर पर हम संस्कृति के अच्छे संवाहक बनेंगे। हमारा केंद्र भारतीय संस्कृति के पोषण का, भारतीय संस्कृति के संग्रहण का, भारतीय संस्कृति के अभिलेखीकरण का एक प्रमुख केंद्र है, एक अंतरराष्ट्रीय केंद्र है। इसलिए हम सबका दायित्व है कि हम सब अपनी भाषा को और सुदृढ़ बनाएं, अधिक समृद्ध बनाएं। ये जो हमारा संकल्प है, यह सिर्फ हिंदी पखवाड़े तक सीमित न रहे, इस 15 दिन तक सीमित न हो। हर साल होने वाले कार्यक्रम तक सीमित न हो, बल्कि हम इसे अपने जीवन का क्रम बनाएं, अपने विचार के क्रम बनाएं। तभी हम सब लोग आगे प्रगति कर सकेंगे, उन्नति कर सकेंगे।

उद्घाटन समारोह का विशेष आकर्षण नीति आयोग की वरिष्ठ हिन्दी अनुवाद अधिकारी सुश्री तपोजा दत्ता एवं उनके समूह द्वारा प्रस्तुत ओडिसी शास्त्रीय नृत्य रहा। शास्त्रीय नृत्य की भाव-भंगिमाओं, लय और सौंदर्यपूर्ण प्रस्तुति ने उपस्थित दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

विविध कार्यक्रमों से सजेगा हिन्दी पखवाड़ा

17 सितंबर को हिन्दी कार्यशाला का आयोजन होगा। 18 सितंबर को संस्मरण लेखन प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी। 21 सितंबर को हिन्दी टिप्पणी एवं प्रारूप लेखन प्रतियोगिता आयोजित होगी, जबकि 22 सितंबर को केन्द्र के अधिकारियों एवं कर्मचारियों के लिए देशभक्ति गीत, लोकगीत एवं गीतों की प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी। 23 सितंबर को सदस्य सचिव हिन्दी प्रोत्साहन पुरस्कार योजना के अंतर्गत हिन्दी में उत्कृष्ट कार्य करने वाले अधिकारियों एवं कर्मचारियों के चयन की प्रक्रिया आयोजित की जाएगी। 24 सितंबर को एम.टी.एस. वर्ग के कर्मचारियों के लिए हिन्दी श्रुतिलेख एवं सुलेख लेखन प्रतियोगिता का आयोजन होगा।

हिन्दी पखवाड़ा का समापन समारोह 30 सितंबर को आयोजित किया जाएगा। इस अवसर पर सदस्य सचिव द्वारा विभिन्न प्रतियोगिताओं में सफल प्रतिभागियों को पुरस्कार एवं प्रमाण-पत्र प्रदान किए जाएंगे।

आईजीएनसीए द्वारा आयोजित हिन्दी पखवाड़ा का उद्देश्य कार्यालयीन कार्यों में हिन्दी के प्रयोग को बढ़ावा देने के साथ-साथ हिन्दी के प्रति रचनात्मक अभिरुचि, साहित्यिक संवेदना और सांस्कृतिक चेतना को प्रोत्साहित करना है।

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में बजा भारत की कूटनीति का डंका 

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लखनऊ। भारत की अध्यक्षता में आयोजित ब्रिक्स समूह के देशों का 18वां  शिखर सम्मेलन सितम्बर 12-13 2026 को संपन्न हुआ। भारत के दृष्टिकोण से 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन कई दृष्टियों से ऐतिहासिक रहा और अंतरराष्ट्र्रीय कूटनीति में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की कूटनीति का डंका बजा । इस सम्मेलन में कई परस्पर  विरोधी देश एक मंच पर दिखे और साझा घोषणापत्र सामने आया जिसे भारतीय कूटनीति की एक बड़ी उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक बार फिर भारत के सांस्कृतिक ब्रांड एंबेसडर बनकर उभरे। नई दिल्ली ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से वैश्विक समुदाय को शांति का संदेश तो दिया ही गया साथ ही पश्चिमी दादागिरी को भी कड़ा संदेश दिया गया।

नई दिल्ली घोषणापत्र इस बात का प्रमाण है कि भारत ने “वसुधैव कुटुम्बकम” के मन्त्र और दबाव रहित स्वतंत्र विदेश नीति के बल पर विश्व की महाशक्तियों के साथ बेहतरीन संतुलन बनाया है। ब्रिक्स शिखर सम्मेलन केवल कूटनीतिक बैठकों का एक और सिलसिला नहीं था अपितु वैश्विक मंच पर भारत के बढ़ते कद राजनीतिक परिपक्वता और कूटनीतिक कौशल का एक स्वर्णिम अध्याय था। आज जब दुनियाभर के देश भू- राजनीतिक तनावों, महाशक्तियों के बीच गहरी होती खाई, बढ़ती दूरियों के बीच खिंचती रेखाओं और दो सक्रिय महायुद्धों के कारण होते ध्रुवीकरण से गुजर रहे हैं तब भारत ने बिखरे हुए और जटिल होते बहुपक्षीय मंच पर असाधारण संतुलन का परिचय दिया है। स्वाभाविक रूप से यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के करिश्माई नेतृत्व व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनकी बढ़ती स्वीकार्यता के कारण ही संभव हो सका है।

एक समय ब्रिक्स समूह में केवल चार सदस्य ही थे जिनकी संख्या अब 11 हो गई है। ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भारत ने हर मोर्चे पर अपने राष्ट्रीय हितों को साधते हुए वैश्विक नेतृत्व की भूमिका निभाई है। ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भारत की सफलताओं में ब्रिक्स घोषणापत्र में जम्मू कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले की स्पष्ट निंदा से लेकर आतंकवाद के सुरक्षित ठिकानों और सीमा पार आतंकी आवाजाही के खिलाफ कड़ी कार्यवाही के संकल्प को स्थान मिलने को मानाजा रहा है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव पर संयम और संवाद की अपील के साथ युद्ध रोकने, परमाणु जोखिम कम करने और विवादों का शांतिपूर्ण समाधान निकालने पर बल दिया जाना भी घोषणापत्र का महत्वपूर्ण अंश है। एकतरफा टैरिफ और व्यापार प्रतिबंधों को लेकर पश्चिमी देशों को कड़ा संदेश दिया गया।

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में  फिलीस्तीन समस्या पर भी विचार किया गया और दो देश समाधान और 1967 की सीमाओं के आधार पर स्वतंत्र फिलीस्तीन का समर्थन किया गया। ब्रिक्स घोषणापत्र में यह भी भारत की सफलता मानी जा रही है कि  ब्रिक्स नेताओं  ने आतंकवाद के सभी  प्रारूपों से निपटने की प्रतिबद्धता दोहराते हुए आतंकियों की सीमा पार आवाजाही को रोकने, आतंकवाद के वित्तपोषण के नेटवर्क को तोड़ने और सुरक्षित पनाहगाहों से निपटने की जरूरत पर बल दिया है यह इसलिए भी महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि अभी तक आतंकवाद के खिलाफ चीन का रवैया निराशाजनक रहा है।

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में पहली बार संयुक्तराष्ट्र महासभा में सुधार पर बल दिया गया भारत- ब्राजील की बड़ी भूमिका का समर्थन किया गया। संयुक्तराष्ट्र महासभा में भारत की स्थायी सदस्यता पर चीन का समर्थन मिलने की सम्भावना बढ़ी है। सम्मेलन से पूर्व सम्भावना व्यक्त की गयी थी  कि ब्रिक्स देश अपनी एक करेंसी लाने पर विचार कर सकते हैं किंतु ऐसा नहीं हुआ अपितु सभी सदस्य देशों ने स्थानीय मुद्राओं में कारोबार को बढ़ावा देने पर बल दिया गया । ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में ईरान और संयुक्त अरब अमीरात के मध्य संवाद स्थापित होने को भी भारत सफलता माना जा रहा है। ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान और यूएई के प्रिंस खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद की यह मुलाकात हाल के वर्षों की सबसे महत्वपूर्ण मुलाकात मानी जा रही है।

प्रधानमंत्री मोदी ने ब्रिक्स सम्मेलन को संबोधित करते हुए वैश्विक वयवस्था में बड़े बदलाव की चर्चा की और कहा कि जो देश वैश्विक आर्थिक विकास के संचालक हैं उन्हें इसे आकार देने में भी उचित भूमिका मिलनी चाहिए। दुनिया के भविष्य के नियम तय करने में हर देश की बराबर भूमिका होनी चाहिए। साइबर स्पेस, एआई,अंतरिक्ष, जैव प्रौद्योगिकी जैसी महत्वपूर्ण तकनीकें भविष्य के अवसर ही नहीं तय कर रहीं अपितु भविष्य के नियम भी तय कर रही हैं ऐसे में वैश्विक दक्षिण के देशों को दूसरे देशों के बनाए नियम मानने वाला नहीं, अपितु नियम बनाने वाला बनना होगा।

सम्मेलन में वैश्विक शासन सुधार का 10 सूत्रीय रोडमैप बनाने का प्रस्ताव भी प्रस्तुत किया गया। सम्मेलन के समापन सत्र में ब्रिक्स का साझा लक्ष्य “सर्वजन हिताय” तय किया गया है। अंतिम सत्र को संबोधित करते हुए प्रधानंमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि ब्रिक्स का सहयोग सरकारों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। इसमें उद्यमियों, किसानों, शोधकर्ताओं, महिलाओं, युवाओं और आम नागरिकों को भी शामिल किया जाना चाहिए। प्रधानमंत्री ने डिजिटल कृषि से संबंधित ब्रिक्स नेटवर्क का उल्लेख किया जिसका उद्देश्य एआई, भू-स्थानिक तकनीक और डिजिटल बुनियादी ढांचे को किसानों की जरूरतों से जोड़ना है। प्रधानमंत्री मोदी ने अंतिेम सत्र में सहयोग के चार स्तंभ बताए जिसमें लचीलापन, स्थिरता, नवाचार के अंतर्गत ब्रिक्स देशों के  स्टार्टअप को आपस में जोड़ने के लिए ब्रिक्स इनक्यूबेटर नेटवर्क बनाने का संकल्प लिया गया है। ब्रिक्स स्टार्टअप इनोवेशन फंड का भी प्रस्ताव किया गया है। ब्रिक्स देशों में संक्रामक बीमारियों की समय रहते हुए पहचान और रोकथाम के लिए  ब्रिक्स इंटीग्रेटेड अर्ली वार्निंग सिस्टम बनाने पर भी सहमति बन गई है। छोटे कारोबारों को मजबूती देने के लिए ब्रिक्स  एमएसएमई  पोर्टल और ब्रिक्स कनेक्ट के माध्यम से कौशल, रोजगार व महिलाओं के लिए अधिक अवसर पैदा करने का संकल्प लिया गया है। ब्रिक्स समूह के देश अब समावेशी, टिकाऊ, लचीले और  स्मार्ट सिटी के निर्माण में भी एक दूसरे का सहयोग करेंगे। इसके लिए ब्रिक्स शहरी अनुसंधान एवं ज्ञान नेटवर्क एव ब्रिक्स शहरी गतिशीलता केंद्र की स्थापना होगी। वर्तमान समय में युद्धों के कारण आपूर्ति श्रृंखला बाधित हुई है अतः मजबूत आपूर्ति श्रृंखला के लिए ब्रिक्स लाजिस्टिक सप्लाई चेन बनाने पर भी बात हुई जिससे सामान की आवाजाही को ज्यादा भरोसेमंद और मजबूत बनाने में सहयोग मिलेगा। ब्रिक्स देशों के मध्य पुरावशेषों व ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व वाली वस्तुओं को उनके मूल देशों को वापस किया जाएगा। कलाकारों और सांस्कृतिक क्षेत्र से जुडे़ लोगों का प्रशिक्षण होगा। ब्रिक्स संस्कृति महोत्सव से लेकर वेब बाजार ब्रिक्स थिएटर महोत्सव होंगे।

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन नई दिल्ली- 2026 से भारत वैश्विक कूटनीति के केंद्र में  मजबूती से स्थापित हो गया है। वैश्विक शांति और संवाद के लिए दुनिया भारत की ओर देख रही है। भविष्य में  भारत और  ब्राजील संयुक्तराष्ट्र महासभा में बड़ी भूमिका में दिखाई दे सकते हैं। ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के अतिथियों को भारतीय संस्कृति का दर्शन कराया गया तथा स्वदेशी शाकाहारी व्यंजन परोसे गए तथा भारतीय स्थानीय उत्पाद उपहार स्वरूप दिए गए। नई दिल्ली में आयोजित यह ब्रिक्स सम्मेलन अब तक सबसे सफल व स्मरणीय आयोजन माना जा रहा है जिसके सकारात्मक परिणाम अवश्यम्भावी हैं।

पनामा में आयोजित ICA चुनाव में इफको अध्यक्ष दिलीप संघाणी ICA ग्लोबल बोर्ड के निदेशक निर्वाचित हुए  

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दिल्ली । अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता आंदोलन के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में इफको (IFFCO) के अध्यक्ष श्री दिलीप संघाणी को इंटरनेशनल कोऑपरेटिव एलायंस (ICA) के ग्लोबल बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में निदेशक (At-Large Director) के रूप में निर्वाचित किया गया है।

श्री दिलीप संघाणी के विजेता घोषित होते ही पनामा में उपस्थित भारतीय सहकारी प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों में उत्साह और गर्व की लहर दौड़ गई। सभी सदस्यों ने एक स्वर में “भारत माता की जय” और “वंदे मातरम्” के नारों से पूरे सभागार को गुंजायमान कर दिया।

विदेशी धरती पर गूंजे “भारत माता की जय” और “वंदेमातरम्” के नारों ने वैश्विक सहकारिता मंच पर भारत की बढ़ती प्रतिष्ठा और प्रभाव को अभिव्यक्त किया।

पनामा सिटी में आयोजित ICA की महासभा के दौरान हुए चुनाव में श्री संघाणी की जीत को भारत के विशाल सहकारिता आंदोलन के लिए गौरवपूर्ण क्षण माना जा रहा है। यह उपलब्धि वैश्विक सहकारिता जगत में भारत की बढ़ती भूमिका, प्रभाव और नेतृत्व को और सशक्त करती है।

श्री दिलीप संघाणी पिछले कई दशकों से सहकारिता क्षेत्र से जुड़े हुए हैं और किसानों, ग्रामीण अर्थव्यवस्था तथा सहकारी संस्थाओं के सशक्तीकरण के लिए निरंतर कार्य करते रहे हैं। वर्तमान में वे IFFCO ओर GUJCOMASOL के अध्यक्ष है ओर विभिन्न राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सहकारी संस्थाओं में महत्वपूर्ण दायित्व निभा चुके हैं।

ICA विश्व का प्रमुख वैश्विक सहकारी संगठन है, जो विभिन्न देशों और क्षेत्रों की सहकारी संस्थाओं का प्रतिनिधित्व करता है। ICA के ग्लोबल बोर्ड में भारत का प्रतिनिधित्व भारतीय सहकारिता आंदोलन की आवाज को अंतरराष्ट्रीय मंच पर और मजबूती प्रदान करेगा।

श्री संघाणी की यह जीत प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के ‘सहकार से समृद्धि’ के विजन तथा भारत के सहकारिता आंदोलन की वैश्विक स्वीकार्यता को भी दर्शाती है। भारत आज सहकारिता के माध्यम से किसानों, ग्रामीण समुदायों और आम नागरिकों के आर्थिक एवं सामाजिक सशक्तीकरण की दिशा में एक नई मिसाल प्रस्तुत कर रहा है।

श्री संघाणी ने अपनी जीत के लिए ICA के सभी सदस्य देशों, प्रतिनिधियों और वैश्विक सहकारिता समुदाय का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वे भारत के सहकारिता आंदोलन की भावना, अनुभव और दृष्टिकोण को वैश्विक मंच पर प्रभावी रूप से प्रस्तुत करने तथा विश्वभर में सहकारिता को और मजबूत बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

श्री दिलीप संघाणी का ICA बोर्ड में निर्वाचन भारत के लिए गौरव, भारतीय सहकारिता आंदोलन के लिए सम्मान और वैश्विक सहकारिता के क्षेत्र में भारत के बढ़ते प्रभाव का महत्वपूर्ण प्रतीक है।

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