कसार देवी से लौटकर

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अल्मोड़ा :जब कसार देवी को याद करता हूँ, तो सबसे पहले जो चीज़ मन में उतरती है, वह केवल उसका दृश्य नहीं, बल्कि उसका मौन है। अल्मोड़ा से लगभग आठ किलोमीटर की दूरी। क्रैंक्स रिज नामक पहाड़ी। समुद्र तल से 2100 मीटर की ऊँचाई पर बसा यह स्थान बाहर से जितना साधारण लगता है, भीतर से उतना ही रहस्यमय है। मंदिर तक पहुँचने वाली चढ़ाई।आसपास फैली बाँज, देवदार और चीड़ की गंध। नीचे लहराती घाटियाँ। हवा की वह ठंडक, जो चेहरे को छूकर जैसे भीतर उतर जाती है। इन सबके बीच कसार देवी किसी छोटे धार्मिक स्थल की तरह नहीं, बल्कि एक जीवित अनुभव की तरह सामने आती है। यहाँ पहुँचकर लगता है कि पहाड़ केवल भूगोल नहीं, स्मृति का विस्तार भी हैं।

यात्राओं पर बने रहना सचमुच एक अलग अनुभव है। प्रकृति का यह अद्भुत जादू है कि वह मनुष्य को बिना कुछ कहे अपने भीतर उतार लेती है। शहर में हम अपने बारे में जितना भी सोचते हों, यात्रा के रास्ते हमें किसी दूसरे, अधिक सच्चे रूप से मिला देते हैं। कसार देवी में मुझे यही हुआ। ऐसा लगा कि इतने वर्षों तक मैं किसी और का जीवन छुपकर जी रहा था। इस यात्रा में पहली बार अपने जीवन की लय को सुन पाया। पर, यह लय या धुन कैसी थी?पहाड़ी हवा, चट्टान की गरिमा और मंदिर के मौन से उपजा हुआ अनुभव था।

कसार देवी मंदिर कुमाऊँ मंडल के अल्मोड़ा जनपद में स्थित है। कश्यप पहाड़ी पर बसा हुआ। स्थानीय परंपरा के अनुसार यह स्थान लगभग दो हजार वर्ष पुराना है। यहाँ मुख्य रूप से देवी दुर्गा के कात्यायनी स्वरूप की पूजा होती है। मंदिर परिसर में पहुँचते ही एक तरह की एकाग्रता महसूस होती है। शायद इसलिए कि यह जगह केवल आस्था की नहीं, साधना की भी भूमि रही है। यहाँ का वातावरण इतना पारदर्शी और शांत है कि हर आने वाला व्यक्ति अपने भीतर की आवाज़ अधिक साफ़ सुनने लगता है।

कसार देवी की चर्चा अक्सर उसकी चुंबकीय शक्ति के साथ की जाती है। स्थानीय मान्यताओं और कुछ शोधपरक चर्चाओं के अनुसार, यह स्थान पृथ्वी के उन दुर्लभ क्षेत्रों में गिना जाता है।यहाँ भू-चुंबकीय प्रभाव और ब्रह्मांडीय ऊर्जा का विशेष संयोग माना गया है। कहा जाता है कि ध्यान के समय यहाँ मन अधिक स्थिर होता है।विचारों की दौड़ धीमी पड़ती है।भीतर एक अनोखी शांति उतरती है। इसी वजह से कुछ लोग इसे साधना के लिए अत्यंत उपयुक्त स्थान मानते हैं। लोकविश्वास में यह भी कहा जाता है कि मंदिर परिसर के भीतर एक स्थान को ‘जीपीएस-8’ के रूप में चिह्नित किया गया है।यहाँ भूगर्भीय चुंबकीय पिंड की उपस्थिति की बात की जाती है। इन दावों का वैज्ञानिक सत्यापन अलग विषय है।पर इतना निश्चित है कि इस स्थान का मानसिक और आध्यात्मिक प्रभाव अत्यंत गहरा महसूस होता है।

कई लोग यह भी मानते हैं कि ऐसे चुंबकीय और कॉस्मिक प्रभाव पूरी दुनिया में कुल जमा तीन स्थानों पर पाए जाते हैं। कसार देवी के साथ सामान्यतः स्टोनहेंज (ब्रिटेन) और माचू पिच्चू (पेरू) का उल्लेख किया जाता है। यह तुलना भले ही लोकप्रिय मान्यताओं का हिस्सा हो, पर इससे इतना तो साफ है कि कसार देवी को केवल स्थानीय आस्था तक सीमित नहीं रखा गया।इसे एक व्यापक, लगभग वैश्विक रहस्य-भूमि के रूप में देखा गया। यहाँ आने वाले कई यात्री इस स्थान को केवल मंदिर नहीं, ऊर्जा-क्षेत्र के रूप में महसूस करते हैं।

शायद यही कारण है कि इस स्थान से स्वामी विवेकानंद का संबंध इसे और भी महत्त्वपूर्ण बनाता है। वे वर्ष 1890 के आसपास यहाँ आए थे। अपनी यात्रा-स्मृति में इस स्थान की शांति और प्रभाव का उल्लेख किया था। कहा जाता है कि उन्होंने यहाँ ध्यान किया। इस क्षेत्र की एकाग्र कर देने वाली नीरवता से गहराई से प्रभावित हुए। विवेकानंद की उपस्थिति कसार देवी को केवल एक तीर्थ नहीं रहने देती, बल्कि भारतीय आध्यात्मिक इतिहास की एक महत्त्वपूर्ण कड़ी में बदल देती है। उनके साथ जुड़ी गुफा आज भी लोगों की स्मृति और श्रद्धा का केंद्र है। उस गुफा में जाकर लगता है कि समय मानो कुछ देर के लिए ठहर गया हो।

कसार देवी के समीप ही भगवान शिव का एक अनूठा मंदिर है।पास में ही रामकृष्ण मिशन का आश्रम भी। यह इस पूरे परिसर को साधना और सेवा की एक व्यापक परंपरा से जोड़ता है। मंदिर के आसपास का वातावरण, आश्रम की उपस्थितिऔर विवेकानंद से जुड़ी स्मृतियाँ मिलकर इस स्थान को खास बनाती हैं। यहाँ आस्था, विचार और अनुशासन एक साथ उपस्थित होते हैं। यहाँ की शांति महज़ बाहरी नहीं, बल्कि भीतरी है। इसी कारण यह जगह बार-बार लौटने के लिए खिंचती है।

इतिहास की दृष्टि से देखें, तो कसार देवी का महत्व केवल भारतीय साधकों तक सीमित नहीं रहा। 1960 और 70 के दशक में यह स्थान हिप्पी आंदोलन से जुड़े यात्रियों और पश्चिमी साधकों के बीच भी चर्चित हुआ। तब इसे ‘क्रैंक रिज’ के नाम से जाना जाने लगा। यह वह दौर था जब दुनिया के अनेक युवा शांति, ध्यान, संगीत और आत्मान्वेषण की खोज में भारत आए। कसार देवी उनके लिए भी एक आकर्षण बनी। बॉब डायलन और टिमोथी लीरी जैसी कुछ चर्चित विदेशी हस्तियों के यहाँ आने की चर्चाएँ प्रचलित हैं। इस समय कसार देवी एक ऐसे सांस्कृतिक मोड़ पर थी, जहाँ स्थानीय पवित्रता और वैश्विक जिज्ञासा एक-दूसरे से मिल रही थीं।

फिर भी कसार देवी की असली शक्ति किसी प्रसिद्ध नाम से नहीं बनती। उसकी शक्ति उस सहज जीवन में है जो पहाड़ के लोग यहाँ जीते हैं। मंदिर की सीढ़ियों पर चढ़ते हुए, पास की दुकानों पर बैठकर चाय पीते हुए, या सामने फैली घाटियों को चुपचाप देखते हुए जो अनुभव मिलता है, वह किसी भी प्रचार से बड़ा है। यहाँ की हवा में एक ऐसी निर्मलता है, जो मनुष्य को थोड़ा धीमा कर देती है। शहर से आए लोग शुरुआत में उसे खालीपन समझ सकते हैं। पर वह खालीपन नहीं, एक गहन उपस्थिति है। वहाँ समय अपनी तेज़ी खो देता है, और मन अपने मूल स्वरूप की ओर लौटने लगता है।

संभवत: कसार देवी से जुड़े रहस्य भी इसी कारण आकर्षक हैं। कुछ लोग इसे चुंबकीय क्षेत्र कहते हैं। कुछ ब्रह्मांडीय ऊर्जा। कुछ साधना का प्रभाव।और कुछ केवल पहाड़ की विशिष्ट शांति। संभव है कि इन सबमें थोड़ा-थोड़ा सच हो। पर्वतीय स्थलों का प्रभाव केवल वैज्ञानिक माप से नहीं समझा जा सकता। वहाँ का मौसम, ऊँचाई, हवा की गति, दृश्य की खुली रचनाऔर मनुष्य की अपनी तैयारी,ये सब मिलकर अनुभव को विशेष बनाते हैं। कसार देवी ऐसा ही स्थान है, जहाँ विज्ञान और आस्था के बीच कोई कठोर दीवार नहीं दिखती।

मुझे वहाँ की वह साँझ अब भी याद है। सूरज सीधा नहीं, तिरछा पड़ रहा था। विदा होने की राह पर। मंदिर परिसर में कम लोग थे। थोड़ी देर पहले आई एक टुकड़ी चली गई थी और उनके जाने के बाद जगह और भी शांत हो गई थी। पास ही एक साधु चुपचाप बैठा था। कुछ दूरी पर एक परिवार अपने बच्चे को मंदिर का महत्त्वबता रहा था। हवा बहुत तेज थी।लेकिन उसमें पहाड़ की गंध साफ थी। उस क्षण लगा कि शायद शांति का सबसे सच्चा रूप वही है, जो किसी बड़े दावे के बिना अपने आप उपस्थित हो। कसार देवी उसी शांति का नाम है।

इस स्थान की एक और खूबी यह है। यहाँ धार्मिकता और प्रकृति का संबंध बहुत सहज है। यहाँ से नंदा देवी, त्रिशूल और पंचचूली जैसी बर्फ से ढकी हिमालयी चोटियों का विहंगम दृश्य दिखाई देता है।मंदिर ऊँचाई पर है, लेकिन उसका प्रभाव नीचे तक फैला हुआ लगता है। रास्ते में पत्थर, झाड़ियाँ, छोटे घर, दूर दिखती घाटियाँ, खेत। स्थानीय लोगों की बातचीत,सब कुछ एक साथ मिलकर कसार देवी की छवि बनाते हैं। यहाँ कोई कृत्रिम भव्यता नहीं। इसकी गरिमा सहजता में है। यही कारण है कि यह जगह केवल दर्शन-स्थल नहीं, अनुभूति-स्थल भी है।

रोलिंग पहाड़ियों और खुली घाटियों वाला यह कुमाऊँ प्रदेश वैसे भी अपने भीतर एक विशेष सौंदर्य रखता है। यहाँ की भौगोलिक बनावट मन को लगातार गति और स्थिरता दोनों का अनुभव कराती है। जहाँ एक ओर ऊँचाई है, वहीं दूसरी ओर सघन वन हैं। एक ओर दूर तक फैला आकाश है, वहीं दूसरी ओर सीधी-सादी ग्रामीण ज़िंदगी है। कसार देवी इसी भूगोल का एक संकेंद्रित रूप है। उसके चारों ओर फैला परिवेश केवल दृश्य नहीं, संस्कार भी है।

जब मैं लौट रहा था, तब भीतर यह साफ था कि यह यात्रा केवल अल्मोड़ा के पास की एक पहाड़ी पर चढ़ने की यात्रा नहीं थी। यह अपने भीतर की चोटी तक पहुँचने की यात्रा थी। वहाँ जाकर यह समझ में आया कि मनुष्य का सबसे बड़ा रहस्य शायद उसकी अपनीलय या धुन है। कसार देवी उस लय को सुनने की जगह देती है। उसकी प्रसिद्धि, उसकी चुंबकीय आभा, विवेकानंद की स्मृति, हिप्पी दौर की कहानियाँ, रामकृष्ण मिशन की उपस्थितिऔर स्थानीय लोकमान्यताएँ, ये सब मिलकर उसे विलक्षण भूमि बनाते हैं।यहाँ इतिहास भी है, भूगोल भी।आत्म-लय की खोज भी।

वस्तुत: कसार देवी से लौटकर जो शेष रहता है, वह केवल याद नहीं होता। वह एक धीमी, स्थायी, गहरी उपस्थिति बन जाता है। और शायद यही हर बड़ी यात्रा का हासिल है। वह हमें बाहर से कम, भीतर से अधिक बदलती है। कसार देवी भी यही करती है। वह चुपचाप अपने पास आने वाले हर व्यक्ति को तनिक अधिक मनुष्यतर,पूर्णतर, कृतज्ञतरऔर थोड़ा अधिक अपना बना देती है।

भारत में मुख्य खाद्य पदार्थों के फोर्टिफिकेशन को बढ़ाने और छिपी भूख से मुकाबला करने हेतु उद्योग जगत के नेताओं का राष्ट्रीय सम्मेलन

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दिल्ली । टेक्नोसर्व द्वारा संचालित मिलर्स फॉर न्यूट्रिशन ने CII FACE के सहयोग से सरकार, उद्योग और पोषण क्षेत्र के नेताओं को फोर्टिफाइड मुख्य खाद्य पदार्थों को अपनाने में तेजी लाने हेतु एक मंच पर एकत्रित किया

नई दिल्ली, 19 मई 2026 – भारत में छिपी भूख और सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी के खिलाफ लड़ाई को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में, टेक्नोसर्व द्वारा संचालित मिलर्स फॉर न्यूट्रिशन ने, CII फूड एंड एग्रीकल्चर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (CII FACE) के सहयोग से, आज नई दिल्ली स्थित इंडिया हैबिटेट सेंटर में आयोजित मुख्य खाद्य पदार्थ उद्योग नेताओं का राष्ट्रीय सम्मेलन — मुख्य खाद्य पदार्थों के फोर्टिफिकेशन को बड़े स्तर पर बढ़ाने हेतु रोडमैप विकसित करने के लिए में प्रमुख नीति-निर्माताओं, खाद्य उद्योग के नेताओं, मिलर्स, पोषण विशेषज्ञों और विकास क्षेत्र के हितधारकों को एकत्रित किया।

यह राष्ट्रीय सम्मेलन खाद्य तेल, चावल और गेहूं के आटे की श्रेणियों में फोर्टिफाइड मुख्य खाद्य पदार्थों को बड़े पैमाने पर अपनाने में तेजी लाने हेतु उद्योग-व्यापी सहयोग को बढ़ावा देने और एक व्यावहारिक रोडमैप तैयार करने के लिए एक प्रमुख राष्ट्रीय मंच के रूप में उभरा। चर्चाओं का केंद्र उद्योग की भागीदारी को मजबूत करना, उपभोक्ता जागरूकता और विश्वास में सुधार करना, रिटेल और व्यावसायिक अपनाने का विस्तार करना, तथा भारत में कुपोषण और छिपी भूख से निपटने हेतु टिकाऊ बाजार-आधारित समाधान तैयार करना रहा।

सम्मेलन को संबोधित करते हुए, टेक्नोसर्व के सीनियर प्रैक्टिस लीडर एवं मिलर्स फॉर न्यूट्रिशन एशिया के प्रोग्राम लीडर श्री मोनोजित इंद्रा ने कहा, “भारत ने मुख्य खाद्य पदार्थों के फोर्टिफिकेशन को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण प्रगति की है, लेकिन बड़े स्तर पर छिपी भूख से निपटने के लिए खाद्य उद्योग पारिस्थितिकी तंत्र में गहरे सहयोग की आवश्यकता होगी। इस सम्मेलन ने फोर्टिफाइड मुख्य खाद्य पदार्थों को अपनाने में तेजी लाने और पोषण प्रभाव के लिए टिकाऊ मार्ग तैयार करने हेतु उद्योग नेताओं, विकास भागीदारों और नीति-निर्माताओं के बीच मजबूत समन्वय स्थापित करने में मदद की है।”

इस राष्ट्रीय सम्मेलन का एक प्रमुख परिणाम यह रहा कि सभी प्रतिभागियों ने सामूहिक रूप से यह स्वीकार किया कि खाद्य फोर्टिफिकेशन को एक नीति-आधारित हस्तक्षेप से आगे बढ़कर नवाचार, उपभोक्ता सहभागिता और मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र साझेदारियों द्वारा समर्थित मुख्यधारा के उद्योग आंदोलन के रूप में विकसित होना चाहिए। हितधारकों ने मिलर्स के लिए उन्नत तकनीकी समर्थन की आवश्यकता, फोर्टिफाइड खाद्य पदार्थों की बेहतर उपलब्धता, गुणवत्ता मानकों पर अधिक उद्योग समन्वय, तथा फोर्टिफाइड मुख्य खाद्य पदार्थों के प्रति उपभोक्ता विश्वास निर्माण हेतु सहयोगात्मक प्रयासों पर विचार-विमर्श किया।

इस पहल के महत्व और परिणामों पर टिप्पणी करते हुए, मिलर्स फॉर न्यूट्रिशन इंडिया के कंट्री प्रोग्राम मैनेजर श्री अभिषेक शुक्ला ने कहा, “सम्मेलन में हुई चर्चाओं ने पुनः पुष्टि की कि फोर्टिफिकेशन भारत में पोषण सुरक्षा को मजबूत करने में परिवर्तनकारी भूमिका निभा सकता है। आज हितधारकों द्वारा प्रदर्शित सामूहिक प्रतिबद्धता बाजार-आधारित दृष्टिकोणों, उद्योग साझेदारियों और बढ़ी हुई उपभोक्ता जागरूकता के माध्यम से फोर्टिफाइड मुख्य खाद्य पदार्थों को बड़े स्तर पर बढ़ाने की दिशा में बढ़ती गति को दर्शाती है।”

इस सम्मेलन में भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) के निदेशक (विज्ञान एवं मानक) डॉ. राकेश कुमार, CII राष्ट्रीय पोषण समिति के पूर्व सह-अध्यक्ष श्री सिराज ए. चौधरी, AWL एग्री बिजनेस के अनुसंधान एवं विकास प्रमुख श्री विद्याशंकर सत्यकुमार, मदर डेयरी फ्रूट एंड वेजिटेबल्स के प्रबंध निदेशक श्री जे टी चारी, तथा द अक्षय पात्र फाउंडेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री भारतारसभा प्रभु सहित वरिष्ठ सरकारी प्रतिनिधियों और उद्योग नेताओं ने भाग लिया।

चर्चाओं में मुख्यधारा के पैकेज्ड खाद्य उत्पादों में पोषण को एकीकृत करने तथा दीर्घकालिक जनस्वास्थ्य प्रभाव प्रदान करने में सक्षम व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य फोर्टिफिकेशन समाधानों को बड़े स्तर पर बढ़ाने में निजी क्षेत्र की बढ़ती भूमिका को रेखांकित किया गया। सम्मेलन का समापन विभिन्न क्षेत्रों के बीच सहयोग को मजबूत करने, फोर्टिफिकेशन उत्कृष्टता को बढ़ावा देने, खाद्य प्रसंस्करणकर्ताओं एवं मिलर्स के लिए क्षमता निर्माण प्रयासों का समर्थन करने तथा भारत भर में फोर्टिफाइड मुख्य खाद्य पदार्थों को बड़े स्तर पर बढ़ाने हेतु क्रियान्वित किए जा सकने वाले मार्गों को और विकसित करने की साझा प्रतिबद्धता के साथ हुआ।

मिलर्स फॉर न्यूट्रिशन
मिलर्स फॉर न्यूट्रिशन को स्ट्रैटेजिक फोर्टिफिकेशन पार्टनर्स: BASF, BioAnalyt, dsm-firmenich, Mühlenchemie, SternVitamin; रीजनल स्ट्रैटेजिक फोर्टिफिकेशन पार्टनर्स: Hexagon Nutrition, Piramal, Sanku; तथा स्थानीय तकनीकी साझेदारों के एक बढ़ते समूह का समर्थन प्राप्त है, जो समाज को लाभ पहुंचाने और व्यवसायिक स्थिरता को बढ़ाने हेतु खाद्य प्रसंस्करण प्रक्रियाओं एवं फोर्टिफिकेशन उत्कृष्टता में सुधार की साझा दृष्टि रखते हैं। मिलर्स फॉर न्यूट्रिशन को टेक्नोसर्व द्वारा संचालित किया जाता है, जिसे Gates Foundation का वित्तीय समर्थन प्राप्त है।

संध्या शर्मा मिश्रा की संग्रहणीय कविताएं

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मैं अज्ञानी !!

नहीं, हिंदी का कोई ज्ञान मुझे,
बस भाव मेरे शब्दों में हैं,
जो अंतर्मन कहता मुझसे
वही, कलम से लिखती जाती हूँ।
क्या भाषा क्या व्याकरण दोनों
का ही मुझको, कुछ ज्ञान नहीं,
जो कुछ लिखती प्रभु की मर्जी,
खुद पर मुझको अभिमान नहीं।
बस दया प्रभु की बनी रहे,
और कलम स्याही से सजी रहे,
शब्द रुपी हर पुष्प मेरा,
मां सरस्वती को चढ़ा रहे।
एक दिन ऐसा भी आयेगा,
मैं भी लेखक बन जाऊंगी,
जिस ज्ञान से वंचित हूँ अब तक,
वो ज्ञान मैं मां से पाऊंगी।
नहीं कहे, कोई अनपढ़ मुझको,
ये साबित कर दिख लाऊंगी,
टूटी फूटी इस हिंदी से
शब्दों का महल बनाऊंगी।

 मां

मां ममता का सागर है
जिसमें प्यार के ढे़रो रत्न समाहित हैं।
मां जल से भरी एक गागर है
जो हर किसी की प्यास
बुझाने में सक्षम है।
मां पूर्णिमा का वो चांद है
जो अंधकार को
उजाले में बदल देता है।
मां मंदिर का वो प्रसाद है
जिसे पाने के लिए
हम सभी लालायित रहते हैं।
मां रोशनी से भरा वो दिया है
जो पूरे परिवार को
प्रकाशित करता है।
मां खुला आसमान है
जिसमें ढे़रों पंक्षी
उड़ान भर सकते हैं।
मां नदी की वो धारा है
जो निर्मल है, स्वच्छ है, प्रवाहित है।
मां अनंत है, शाश्वत है,
सत्य है, क्योंकि वो मां है
क्योंकि वो मां है।

शिव परिवार की महिमा अपार 

देवों के ये महादेव हैं
भार्या इनकी पार्वती
पुत्र रूप में मिले कार्तिकेय
और मिले हैं गणपति
स्वयं वासुकी कंठ विराजे
द्वारपाल जिनके नदी
ऐसे सुंदर शिव परिवार की
छवि मन में बस बसी रहे
यही कामना प्रभु से मेरी
सब पर उनकी कृपा रहे।

मेरे भारत का तिरंगा 

ले, “देश प्रेम” की ऊन का गोला,
मन मेरा भीतर से बोला,
कुछ अद्भुत सा आज बनाऊं,
भारत को मैं स्वयं पहनाऊं।
डाल दिए कुछ मोटे फंदे,
शुरू हो गई मंदे मंदे,
नीचे रंग हरा झंडे में,
हरी ऊंन से लगी तब बुनने
देश भक्ति का गीत लगाकर,
फंदों में फंदा उलझा कर,
धीरे-धीरे हाथ बढ़़ाकर,
पाई खुशी बॉर्डर बना कर।
पूर्ण हो गया बॉर्डर मेरा,
श्वेत रंग का करूं, अब फेरा,
धीरे-धीरे श्वेत बुना अब,
मध्य पेट तक पहुंच गई तब।
याद चक्र की मन में आई,
24 तिल्ली तुरंत बनाई,
गोल चक्र यह नीले रंग का,
श्वेत रंग पर लगे सुन्दर सा।
श्वेत रंग कुछ और बढ़ाया
ध्वज मेरा बनने को आया,
अब केसरिया रंग लगाया,
मुड्ढा गला तब साथ घटाया।
बारी अब सिलने की आई,
सुई में धागा डालकर लाई,
दोनों साइड करी सिलाई,
भारत को आवाज लगाई।
भारत इसे पहनकर आना,
पहन इसे तुम घर घर जाना,
देश विदेश में नाम कमाना
झण्डे को सम्मान दिलाना।
भारत पहन पहन मुस्काए.
अंदर से फुले ना समाय,
लहर लहर हरदम लहराये
हर दिन ये सम्मान है पाये।
जय हिंद, जय भारत
संध्या शर्मा मिश्रा

विश्व गौरैया दिवस पर मेरी कुछ पंक्तियां उन नन्हीं नन्हीं चिड़ियों के लिए जिनके साथ बचपन में हम सबसे पहले खेले थे।

विलुप्त होती गौरैया

मेरे उठने से पहले जो,
खुद खिड़की पर आती है,
चीं चीं की आवाज लगा जो,
मुझको स्वयं जगाती है।
दाना जब चावल का डालूं,
झठ से सब चुग जाती है,
नहीं अकेले आती है जो
सखियों को भी लाती है।
मिट्टी के बर्तन में ठंडा,
जब पानी पी कर जाती है,
फुदक फुदक कर, इधर-उधर फिर
अपनी खुशी जताती है‌।
लुप्त हो रहा जीवन जिनका,
ऊंची इमारतों के बन जाने से,
नाम मात्र गौरैया दिखती अब,
जंगलों के कट जाने से।
इनके बारे में सब सोचें,
ये पंछी राग सुनाते हैं,
हम सबके सूने जीवन में जो,
ढेरों खुशियां भर जाते हैं।
चलो सभी हम मिलजुलकर,
ऐसा अभियान चलाते हैं,
जहां दिखे गौरैया हमको,
जीवन हम उनका बचाते हैं।

ओजोन परत 

ओजोन परत की रक्षा करना
पहला धर्म हमारा है
मिलजुल कर ये काम करेंगे
सबने मन में ठाना है ।
हुई हवा जहरीले देखो
धरती को हमें बचाना है
छोड़ पॉलीथीन अब थैला
कैनवास का घर लाना है।

सूरज और ये सफर 

सूरज को साथ चलते
देखा होगा सभी ने जो
किया होगा सफर कभी
ट्रेन में या बस में
सूरज जैसा यश फैलाओ
तुम भी सबके साथ चलो
याद करेंगे सभी
जीते जी और बाद मरने के
एकता की डोर थामें
आगे बढ़ते जाओगे तो
मंजिल तुमसे कुछ पूछेगी
रास्ते शहर के
मन में एक विश्वास जगाकर
दृढ़ता को हमराज बनाकर
जो भी सोचोगे कर लोगे
आज और कल में
तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र का
गर वृक्षों सा विस्तार करो,तो
देश क्या विदेशों की भी
छवि बन जाओगे।
मन में खुशियों के फूल खिलाकर
अंतर्मन सजाओगे तो
फूलों सी महकती बगिया
मन ही में पाओगे।
सूरज को साथ चलते
देखा होगा सभी न जो
किया होगा सफर कभी
ट्रेन में या बस में।

भारत को स्वच्छ बनाना है

प्रकृति की हर चीज़ बचाना,
पहला धर्म हमारा है,
पर्यावरण की श्रेष्ठ मुहीम को,
आगे तक ले जाना है।
सर्व प्रथम हमें जल स्वच्छता,
का महत्व समझाना है,
स्वच्छ जल उपयोग में लाकर,
रोगों को दूर भगाना है।
आस पास की जमा गंदगी,
का भी ध्यान दिलाना है,
जल्दी ही फैले कचरे को,
सड़कों से हटवाना है।
तत्पश्चात नालियों को भी,
ऊपर से ढकवाना है,
खुले हुए गर कहीं गटर हों,
उन्हें फ़ौरन बंद कराना हैं।
शौचालयों के निर्माण में भी
सबको सहयोग दिखाना है,
खुद पहले आगे आएं,
फिर औरों को आगे लाना है।
एक छोटे सहयोग की आशा,
हर जन से करते जाना है,
इस अभियान की सरल भावना,
का परिचय करवाना है।
फल सब्जी का बचे जो छिल्का,
उसे पशुओं तक पहुंचाना है,
एक स्वच्छ आहार रूप में,
उन सबको उपलब्ध कराना है।
वनों को अपनी मान धरोहर,
कटने से रुकवाना है,
कुछ छोटे योगदानों से ही,
इस मुहीम को श्रेष्ठ बनाना है।
सब नदियों को स्वच्छ बनाकर,
उनका भी मान बढ़ाना है,
गंगा तट पर जमा गंदगी,
को भी साफ कराना है।
भारत के सुंदर आँगन में,
स्वच्छता का दीप जलाना है,
जिसके प्रकाश की किरणों को,
हमें दूर देश ले जाना हैं।
गर, सब ही मिलकर करें पहल,
तो देश लगेगा एक महल,
इस महल के चारों ओर हमें,
फिर वृक्षों को लगवाना है।
पर्यावरण बचाना है।
हमें पर्यावरण बचाना है।
भारत को स्वच्छ बनाना है,
हमें पर्यावरण बचाना है।

 उड़ान 

सपनों की तुम भरो उड़ान…
खुला हुआ सारा आसमान,
नील गगन में पंख फैलाकर,
मन में एक उत्साह जगाकर,
अंतर्मन को करो प्रणाम।
सपनों कि तुम,……
कुछ ऐसा करने की  ठानो,
बात स्वयं के हृदय की मानो,
करो कोई अदभुद सा काम,
बन जाओ मानुष महान।
सपनों कि तुम……..
सपनों की कोई उम्र ना मानो,
जब सोंचों करने की ठानो,
क्षेत्र कोई भी तुम अपना लो,
वक़्त को तुम अनमोल बनालो।
सपनों कि तुम …..
बनो कोई सैनिक या जवान,
या पायलट बन भरो उड़ान,
बस बढ़े देश कि जिससे शान,
ऐसा करना कोई कार्य महान।
सपनो की तुम……….
गायक या लेखक का सपना,
लगे हृदय को जो भी अपना,
जिस भी विषय पर कोशिश करना,
रखना अर्जुन जैसा ध्यान।
सपनों कि तुम भरो उड़ान …

 घर

घर को मिले अनेकों नाम
गृह, निवास या कहें, मकान।
झोपड़, कुटिया, या झुग्गी कह लो,
चौल, सराय कहीं भी रह लो,
पेड़ तले या सड़क किनारे,
स्टेशन,  मंदिर के द्वारे,
गिरिजा, मस्जिद या गुरुद्वारे,
जहां साथ होता परिवार,
मिलता घर जैसा एहसास।

बसंत सत्र —  फूलों की सभा

फूलों ने एक सभा बुलाई,
बाट निमंत्रण खुशबू फैलाई,
देख निमंत्रण रंग बिरंगा,
तितली मन ही मन मुस्काई।
सर्वप्रथम भंवरों ने आकर,
गुनगुन का एक राग सुना कर,
हरे भरे नव पल्लव वाले,
उपवन में हलचल सी मचाई।
रंग-बिरंगे परिधानों में,
साड़ी, सूट, घागरो में,
एक, दो तीन…. नहीं पूरी ही,
टोली में सब तितली आईं।
सर सर सर सर मस्त पवन ने,
आसपास के भी उपवन में,
धूल उड़ा कर शोर मचा कर,
अपनी भी उपस्थिति दर्शाई।
कोयल ने मीठी वाणी संग
तोतो ने पहना धानी रंग
और झुंड में कुछ चिड़ियों ने,
चीं चीं  की आवाज लगाई।
कौआ, बत्तख और गिलेहरी,
बगुला सारस बने थे प्रहरी,
दोनों ने सबकी, की अगुवाई,
सत्र की शोभा और बढ़ाई।
सत्र चला ये देर शाम तक,
जमा सभी थे खास, आम तक
सबने मिलकर धूम मचाई,
एक दूजे से पहचान कराई।
चांद भी खुद को रोक न पाया
तारों को अपने संग लाया,
शाम भी कुछ-कुछ अब गहराई
निशा को भी आवाज लगाई।
देख सभी की खुशी अनूठी,
निशा रहे क्यूं छूटी-छूटी?
उसने भी उपस्थिति दिखाई,
चरण को अंतिम साथ ले आई।
सत्र में सब ने धूम मचाई,
ढेरों खुशियां सबके मन भाईं,
खुशी-खुशी इस सत्र से सबको
देते हैं सब फूल विदाई।

 

सरल और लयबद्ध भाषा में लिखी गई मेरी ये कविता उन गांव, देहात और कस्बों के लिए है जहां बच्चे आज भी टोली बनाकर जागरूकता फैलाने का काम कर सकते हैं। आशा है मेरी इस छोटी सी कविता के द्वारा की गई मेरी ये कोशिश उन तक पहुंचेगी।

पर्यावरण और कोरोना

काट कोरोना की जड़ को,
अब पर्यावरण बचाना है।
वातावरण में घुला कोरोना,
उसको शीघ्र भगाना है।
स्वच्छ्ता का पेड़ लगाना,
जन-जन को सिखलाना है।
मास्क पहनकर बचे रहोगे,
सबको ये बतलाना है।
जितना हो सब पेड़ लगायें,
सैनिटाइजर भी घर लायें,
आम, आँवला नीबू पानी,
हर दिन पीते रहना है।
काट कोरोना की जड़ को,
हमें पर्यावरण बचाना है।
जयहिंद, जय भारत
संध्या शर्मा मिश्रा

मंजिल 

मंजिल की गर तलाश है
तो राहों को ना देखो कभी,
राहों में कांटों का होना,
कोई नामुमकिन नही।
कांटों से उलझने के बाद ही
फूलों का मिल पाना है मुमकिन
कांटों के बिन फूलों का
मिल पाना मुमकिन नहीं।
नामुमकिन को मुमकिन करें
मंजिल तभी मिल पाएगी
गर मिल गई मंजिल हमें,
तो जिंदगी बन जाएगी।
इसलिए मंजिल की तलाश में
आगे बढ़ता चल ए मेरे दिल
ए मेरे मन है मेरे हर कदम…

मेरी राष्ट्रभाषा हिंदी

हिंदी माथे की बिंदी है,
भारत के माथे पर सजती है,
यह गौरव है मेरे देश का,
हर देश में जानी जाती है।
क्यों कहते हैं कुछ लोग इसे?
अनपढ़ लोगों की भाषा है
अज्ञानी हम कहें उन्हें,
यह सबसे मेरी आशा है।
हिंदी दिल हिंदुस्तानियों का,
इस दिल को दिल में रखना है,
इसको ना खोने दें हम सब,
यह सबसे मेरा कहना है।
हिंदी से एम.ए करने का
मुझको भी सौभाग्य मिला
केवल हिंदी के कारण ही,
हर दिन मुझको सम्मान मिला।
जय हिंद जय हिंदी
जय हिंदुस्तानियों

कविता मेरी भी गीत बनें

कविता मेरी भी गीत बनें
संगीत का उसको साथ मिले
कोई तो होगा इस जग में
जिसकी इसको आवाज मिले।
कविता मेरी भी गीत बनें…
नहीं सुरों का कोई ज्ञान मुझे
बस लिखना थोड़ा जानू मैं
पर दिल मेरा भी करता है
कविता को सुर और ताल मिले।
कविता मेरी भी गीत बनें।
जिसके मन को जो भा जाए
वो उस कविता को गा जाए
एक बार तो गाकर के देखे
मैं रोज़ एक आवाज़ लिखूं।
कविता मेरी भी गीत बनें….
सूनापन इसके कम कर दें
संगीत की इसमें धुन भर दे
हैं स्वरों के तो सरताज़ कई
कोई मेरी कविता में, स्वर भर दे।
कविता मेरी भी गीत बनें।
मेरा प्यारा भारत
मेरे प्यारे भारत की
हर देश में शान निराली है
इसने अपनी उपलब्धियों से
एक अद्भुत छवि बना ली है,
जो ना ही मिटी है ना ही मिटेगी,
हर दिन अब यह और बढ़ेगी,
हर भारतवासी की कोशिश से
युग युगांतर तक चलने वाली है,
इसकी पावन मिट्टी की खुशबू
भीनी और मतवाली है,
हर वीर के दिल में यह खुशबू
नए जोश को भरने वाली है,
मेरे प्यारे भारत की
हर देश में शान  निराली है।
जय हिंद, जय भारत

समुन्द्र सी बन जाओ तुम

समुन्द्र सी बन जाओ तुम,
अंदर गहराई लाओ तुम,
ऊंची लहरों सी उठकर, अब,
अपना मान बढ़ाओ तुम।
समुन्द्र सी बन जाओ तुम…
सागर की लहरों के जैसा,
कुछ करतब दिखलाओ तुम।
कभी शांत होकर दिखलाओ,
कभी रौद्र हो जाओ तुम।
समुन्द्र …..
सुबह तुम्हारी अलग चमक हो,
रात को एक दम अलग दमक हो।
अंदर जो बहुमूल्य खजाना,
उसको अब बाहर लाओ तुम।
समुद्र ……
कुछ न कहकर भी सबसे, अब
सब कुछ, बस कह जाओ तुम,
समुन्द्र सी बन जाओ तुम…
बस समुन्द्र सी बन जाओ तुम।

नारी एक शक्ति 

नारी को शक्ति का नाम मिला
पर पास नहीं शक्ति कोई
वह क्यों इतनी आसक्त रहे?
क्यों होती वह सशक्त नहीं?
मन और अंतर्मन दोनों ही
भरते हर पल विश्वास यही
बढ़ो चलो तुम डरो नहीं
अब पीछे-पीछे चलो नहीं
आगे बढ़कर दिखलाओ तुम,
अब दुर्बल न कहलाओ तुम
तुम शक्ति का एक रूप ही हो
खुद की शक्ति बन जाओ तुम।

मौसम

कल तक जो तप रहा था मौसम,
गर्मी बनकर छाया था,
रात हुई तो रौद्र रूप में
आंधी बनकर आया था।
घोर कड़कती उस बिजली से
सबका मन घबडाया था
अश्रु रूप में फिर बारिश ने,
कुछ अपना दुख दर्शाया था।
शीत पवन के उन झोंकों ने,
सबका मन हर्षाया था ।
मिला-जुलाकर देखें तो
मौसम का मेल सुहाना था।
कई दिनों के बाद अचानक
ऐसा मौसम आया था।
कई दिनों के बाद अचानक
ऐसा मौसम आया था।

सूरज और बादल 

सूरज ने छिप-कर झांका जब
नीले अंबर के आंचल से,
तब भोर हुई चिड़ियां चहकी
बिखरी लाली उस बादल में,
नील गगन तब, लगा चमकने
जब भानू भी आगे आया
तभी क्षितिज में रवि बढ़ा
और तेज उजाला फैलाया
जगमग सब हो गया आसमाँ
उस दिनेश की लाली से
कुछ क्षण पहले जो केवल
बस झांक रहा था बादल से।

चिड़िया रानी (बालगीत)

चिड़िया रानी बड़ी सयानी
दाना कहां से लाती हो?
किस पल तुम किस डाल पे बैठी
किसे बताकर जाती हो?
चिड़िया रानी….
सुबह सवेरे नील गगन का
चक्कर लगा के आती हो
किस घर तुमने दाना खाया
किस घर पानी पाती हो?
चिड़िया रानी……
हरे भरे बागों में जाकर
मीठा गीत सुनाती हो
या ऊंची डाली पर जाकर
चुपके से सो जाती हो।
चिड़िया रानी…
प्यारी सी एक जगह ढूंढकर
घर क्यों नहीं बनाती हो?
कहां रहोगी बारिश में ये
सोच नहीं क्यों पाती हो?
चिड़िया रानी…. ओ चिड़िया रानी
सुनकर करोगी, सदा अनसुना
क्या बात समझ न आती है
पंखों का गहना, तुम्हें मिला
क्या इस वजह से, तुम इतराती हो?
या ऊंचा उड़ने की प्रेरणा
हम सब में भर जाती हो
फुर्र से उड़कर या सबको
कोई संदेश सुनाती हो।
चिड़िया रानी… चिड़िया रानी.

एक कबूतरी दो अण्डे 

एक कबूतरी दो अंडों संग
मेरे छज्जे पर रहती है,
सर्दी, गर्मी, या बारिश हो
अपने अंडों को सेती है ।
फिर दो बच्चे बाहर आकर
मां की ममता बन जाते हैं,
उस छज्जे पर, मां के संग वो
खूब मजे से रहते हैं।
हरी मूंग, पीली मक्का, और
चावल के भी कुछ दाने,
बहुत पसंद हैं उनको तीनों
को, ठंडे पानी के संग खाने।
सुबह सबेरे ची ची की
आवाज लगाने लगते हैं,
अगर आँख से ओझल हो मां
तुरंत बुलाने लगते हैं।
आंगन तो अब नहीं घरों में
पर छज्जे, हर घर में होते हैं,
तभी तो देखो अब छज्जों पर
चिड़ियों के बच्चे रहते हैं।
हो सके अगर, कोशिश करना
आंगन वाले घर बन जाएं,
एक, दो, तीन नहीं टोली में
चिड़ियों के, बच्चे, पल जायें।

मुस्लिम लीग, केरलम और बहुत कुछ…

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– प्रशांत पोळ

दिल्ली । 1947 मे भारत के विभाजन के जो अनेक कारक (factors) रहे, उनमे मुस्लिम लीग प्रमुख हैं। मुस्लिम लीग ने ही अलग मुस्लिम राष्ट्र की मांग रखी। उसे ‘पाकिस्तान’ नाम दिया। पाकिस्तान के लिए हिंसक आंदोलन किए। ‘डाइरेक्ट एक्शन डे’ जैसा खुंखार कदम उठाया। उस दिन (16 अगस्त 1946 को) कलकत्ता मे 5,000 हिंदुओं की हत्या करके खून की नदियां बहाई। इस पर भी विभाजन की मांग नही मानी गई, तो दो महिने बाद नोआखाली मे दस हजार हिंदुओं का नरसंहार किया। कांग्रेस नेताओं को झुकाया और पाकिस्तान की बात मनवा ली।

लेकिन 15 अगस्त 1947 के बाद, इस मुस्लिम लीग का क्या हुआ..?

पाकिस्तान मे तो वो सत्तारुढ पार्टी बनी। जैसे अपने यहां कांग्रेस थी, वैसे पाकिस्तान मे मुस्लिम लीग। किंतू जिन्ना और लियाकत अली खान की मृत्यु के पश्चात, मुस्लिम लीग मे मतभेद बढने लगे। जनरल अयूब खान शासक बनने के पश्चात, मुस्लिम लीग 3 धडों मे बट गई। तब तक पूर्व पाकिस्तान अलग देश नही बना था। वहां मुस्लिम लीग से टूटकर अलग पार्टी बनी – अवामी लीग, जिसके नेता थे शेख मुजीब रहमान। अवामी लीग के नेतृत्व मे ही 1971 के संघर्ष के बाद, बांग्लादेश की निर्मिती हुई।

संक्षेप मे, भारत से टूटकर बने दोनो मुस्लिम देशों को, मुस्लिम लीग के नेताओं ने ही बनाया और प्रारंभ के कुछ वर्षों मे उन्ही ने इन दोनों देशों पर राज किया।

स्वतंत्रता के बाद भारत मे मुस्लिम लीग का क्या हुआ?

शुरुआत के दिनों मे तो, भारत मे रह गए मुस्लिम लीग के नेता बडे अवसादग्रस्त थे। उन्हे उनका राजनैतिक भविष्य अंधकारमय दिख रहा था। इनमे से अनेक, कांग्रेस मे चले गए। कांग्रेस ने उनका लाल कालीन बिछाकर स्वागत किया। प्रारंभ मे मुस्लिम नेताओं को लगा कि अब चुंकी पाकिस्तान अलग हो गया हैं, तो भारत मे, भारत की परंपरा, पध्दति और व्यवस्था के अनुरुप ही रहना पडेगा। वैसी उनकी मानसिकता भी बन रही थी। किंतू उन्होने देखा कि कांग्रेस, मुसलमानों को ज्यादा महत्व दे रही हैं। साथ ही महात्मा गांधीजी की हत्या के बाद, हिंदू हित की बात करनेवाले संगठनों पर प्रतिबंध लगाया गया। अगले दस – बारह वर्ष, हिंदू संगठनों को कुचला गया। स्वाभाविक था कि मुस्लिम संगठनों को खुली छूट मिली।

भारत मे लस्त-पस्त पडी मुस्लिम लीग मे जान आने लगी। गांधीजी की हत्या के तुरंत बाद, भारत का विभाजन करने वाली मुस्लिम लीग के भारतीय धडे ने अपना चेहरा थोडासा बदल लिया। अब उनका नाम हुआ – ‘इंडियन युनियन मुस्लिम लीग’। विशेषतः केरल मे इनका प्रभाव बढता गया। मलप्पुरम, कोझिकोड, कन्नूर, कासरगोड यह जिले मुस्लिम बहुल बनते गए, तो मुस्लिम लीग यहां की प्रमुख पार्टी बनती गई। मोहम्मद इस्माईल, आईयुएमएल (Indian Union Muslim League) के संस्थापक रहे, तो मोहम्मद कोया, 1979 मे 3 महिनों के लिए केरल के मुख्यमंत्री भी रहे।

कांग्रेस ने केरल मे हमेशा से मुस्लिम लीग को साथ लिया हैं। यूपीए की सरकार मे, मुस्लिम लीग के ई. अहमद केंद्रीय मंत्री थे। वे जब रेल राज्यमंत्री थे, तब नई प्रारंभ होनेवाली ट्रेनों मे इंजिन की पूजा वगैरह करने की सख्त मनाई थी।

अभी इस महिने केरलम विधानसभा के जो परिणाम निकले, उनमे कांग्रेस – मुस्लिम लीग गठबंधन को 100 से उपर सीटें और पूर्ण बहुमत मिला। इसमे मुस्लिम लीग को 22 सीटें मिली हैं। गठबंधन मे कांग्रेस के बाद दुसरे नंबर पर। मुस्लिम लीग के दबाव के चलते, कांग्रेस को मुख्यमंत्री का नाम घोषित करने मे इतना विलंब हुआ।

आज जिस मंत्रिमंडल ने शपथ ली हैं, उनमे मुस्लिम लीग के 5 मंत्री हैं। 1. P. K. Kunhalikutty, 2. P. K. Basheer 3. K. M. Shaji 4. N. Shamsudheen 5. V. E. Abdul Gafoor.

*दुर्भाग्य देखिये.. जिस मुस्लिम लीग के नेता खुर्रम ने 1946 मे नेहरु जी को जिंदा गाड देने की धमकी दी थी, जिस मुस्लिम लीग ने गांधीजी की तौहीन की थी, जिस मुस्लीम लीग ने डाइरेक्ट एक्शन डे के नाम पर हिंदुओं के खून से बंगाल की सडकों को पाट दिया था, जो मुस्लिम लीग आज भी केरलम की सडकों पर सरे आम हिंसक प्रदर्शन करती हैं, ‘सर तन से जुदा’ के नारे लगाती हैं…*

*ऐसे धर्मांध मुस्लिम लीग के साथ कांग्रेस गठबंधन करती हैं, उनके साथ मंत्रीपद साझा करती हैं, उनको सम्मान देती हैं..*

*और देश के तमाम कांग्रेसी, तमाम सेक्युलर, तमाम ‘धर्मनिरपेक्ष’ पत्रकार, चुप बैठते हैं, खामोशी ओढ लेते हैं…*

ये देश का दुर्भाग्य हैं..!

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